अरे ओ,दोगले मीडिया वालों  होश में आओ,चंदन का सच बताओ !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
कासगंज की घटना ने एक बार फिर भारतीय मीडिया को नंगा कर दिया है। मीडिआ के बिकाऊ पन को सबके सामने ला कर रख दिया है। एक अखलाख की मौत पर मातम मनाने वाली मीडिया चंदन गुप्ता की ह्त्या को लेकर मनगढ़ंत कहानियां सुना रही है। कुछ मीडिया घरानों को यदि दरकिनार कर दिया जाए तो बाकी मीडिया वाले चंदन गुप्ता के तिरंगा प्रेम को ही ढोंग साबित करने में लग गए हैं। लानत है ऐसे मीडिया हाउस चलाने वालों पर जो कि तिरंगा की आन – बान और शान की हिफाज़त नहीं कर सकते। राष्ट्रप्रेम को सर्वोच्च मानने वाले पत्रकार इस वक़्त कहाँ हैं ? बात बात पर पुरस्कार लौटाने वाला उल्लू गैंग किधर है ? क्या सबके सब किसी कोठे पर जाकर अपना वस्त्र खूंटी पर टांग चुके हैं ? हिन्दुस्तान में यदि पकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने पर किसी देश भक्त का खून नहीं खौलता तो  लानत है ऐसे देशवासियों पर। देश को गद्दारों का मायका बना कर तमाशा देखने वालों को अब हर हाल में सबक सिखाने का समय आ गया है। हम राष्ट्र भक्ति को सर्वोच्च मानने वालों में से एक हैं। यदि तिरंगा यात्रा किसी मुस्लिम धर्मावलम्बी ने निकाली होती और उस पर हमला होता तो  हम उसका भी विरोध करते। हमारी नज़र में राष्ट्रधर्म से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। राष्ट्र बचा तो धर्म बचेगा। यदि कोई राष्ट्र से बढ़कर खुद के धर्म को मानता है तो ऐसे व्यक्ति को तुरंत हिन्दुस्तान छोड़कर निकल जाना चाहिए।  साथ ही साथ यदि कोई मीडिया हाउस भी राष्ट्र से बढ़कर किसी धर्म विशेष को महत्व देता है तो ऐसे मीडिया हाउस को तुरंत बैन कर देना चाहिए। हमें पत्रकारिता में हिज़डों की फ़ौज की कोई ज़रूरत नहीं है। पत्रकारिता को वैश्याओं का अड्डा बनाने वाले पत्रकारों को पत्रकारिता का पवित्र पेशा छोड़कर किसी चकलाघर में नौकरी कर लेनी चाहिए। देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करके खुद को पत्रकार कहलवाने से अच्छा है कि वैश्याओं की दलाली करो , देश विरोधी ताक़तों के भी बिस्तर गर्म करवाओ। कम से कम यह तो होगा कि दलाली के पेशे में ईमानदारी से काम करोगे। यदि राष्ट्र प्रेम की भावना को दरकिनार करके पत्रकारिता करनी है तो उससे बेहतर है कि छोड़ दो यह पेशा , यह पेशा पवित्र है इसको पवित्र ही रहने दो
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