अवार्ड वापसी पार्ट -२ :प्रकाश राज – नई खाज !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
किसी सिरफिरे के हाथों मारी गई  (तथाकथित ) पत्रकार गौरी लंकेश की मौत को लेकर फिर एक बार अवार्ड वापसी गिरोह सक्रिय हो उठने की तैयारी में लग गया है।  इस बार कोई लेखक अथवा कवी या फिर कोई फिरकापरस्त पत्रकार नहीं बल्कि एक अभिनेता है जो कि फिल्मनिर्देशक की उँगलियों पर नाचता है और फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाता है।
इस खलनायक रुपी अभिनेता का नाम प्रकाश राज है , हिंदी में सिंघम और वांटेड जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका साकार कर प्रसिद्धि बटोरने वाले इस प्रकाश राज ने आखिरकार अपने अंदर विराजमान मंद बुद्धि का दर्शन करवा ही दिया। इन महाशय ने अपने एक भाषण में कहा कि यदि गौरी लंकेश के हत्यारों को जल्द नहीं पकड़ा गया तो यह महाशय अपने सभी अवार्ड लौटा देंगे। वाह बहुत खूब ! ऐसे दो टके के नाच गाने वाले अभिनेता से उम्मीद भी क्या की जा सकती है ? हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करके कुछ सुर्खियां क्या बटोर लीं खुद को तीस मारखां समझने लगे। प्रकाश राज जैसे अभिनेता खुद को देश के क़ानून से बड़ा समझने लगे हैं , इन अभिनेताओं को सुर्खियां बटोरने का शौंक है और यह लोग अच्छी तरह से समझते हैं कि सुर्ख़ियों में कैसे रहा जा सकता है।
देश की क़ानून व्यवस्था पर यदि इन लोगों को भरोसा नहीं है तो इनको उस देश में चले जाना चाहिए जहां इनकी भावनाओं  की इनके मन के हिसाब से कद्र होती होगी। जिसे हिन्दुस्तान के क़ानून पर भरोसा नहीं है उसको हिन्दुस्तान में रहने का भी कोई हक़ नहीं है।  प्रकाश राज जैसे लोगों को पिछवाड़े पर लात मारकर देश निकाला दे देना चाहिए क्योंकि यह लोग इसी लायक हैं और इसी तरह की भाषा भी समझते हैं। यदि अवार्ड वापसी से कुछ हल निकलता है तो ज़रूर अवार्ड वापसी होनी चाहिए , मगर सिर्फ और सिर्फ कुंठित मानसिकता को दर्शाने के लिए यदि अवार्ड वापसी करने की घोषणा की गई हो तो इन जैसों के लिए देश निकाला ही एक मात्र पर्याय है।
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