आइये जाने इक़बाल कासकर के राजनीतिक पंटर कौन, बड़ा खुलासा ??

( कर्ण हिन्दुस्तानी )
आखिरकार मुंबई और ठाणे पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम के सगे भाई इक़बाल कासकर को सरकारी कंगन (हथकड़ी ) पहना ही दिए गए। कराची से हिन्दुस्तान आयात किये गए इक़बाल कासकर पर पहले तो ढिंढोरा पीटा गया कि इक़बाल पर कोई केस नहीं है , इसके बाद इक़बाल कासकर को हाल ही में हुई इमारत दुर्घटना में समाजसेवक बताते हुए अखबारनवीसों ने खूब चमकाया। मगर इन सब में कोई भी यह नहीं जानता था कि इक़बाल सामान्य  जीवन जीने के बजाए एक हफ्तावसूली गिरोह का मुखिया था और अपने भाई दाऊद की तर्ज पर ही वह अपना साम्राज्य मुंबई में खड़ा कर चुका था।
मुंबई के पास के ही ठाणे जिला में इक़बाल की वसूली बड़े पैमाने पर चल रही थी। विभिन्न भवन निर्माताओं से फ्लैट और नगद राशि वसूलना इक़बाल का मुख्य काम था। इसके लिए इक़बाल अपने भाई दाऊद की धमकी भी भवन निर्माताओं को देता था। हफ्ते के रूप में लिए गए फ्लैट को इक़बाल बेच कर क्रोरोडों रुपया कमाता था। अब सवाल यह उठता है कि इक़बाल को किन लोगों ने रातों रात मदद करके दहशतगर्द बना दिया। सभी जानते हैं कि दाऊद के राजनीतिक संबंध किस पार्टी और किस कद्दावार नेता से रहे हैं , चाहे वह पप्पू कालानी हो या फिर भिवंडी के नगराध्यक्ष जयंत सूर्यराव हो सभी एक ज़माने में दाऊद के लिए काम करते थे।
केंद्र से रक्षामंत्री की कुर्सी छोड़ कर महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने कौन आया था यह सभी जानते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इक़बाल को राजनीतिक संरक्षण देने वाले कौन हैं ? कौन हैं वह लोग जो आज भी दाऊद के इशारे पर काम कर रहे हैं ? दाऊद की बहन पर फिल्म बनाने वालों को भी आरोपी के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए , क्या हिंदी फिल्म इंडस्ट्रीज में विषय की कमी हो गई है जो अरुण गवली और दाऊद की बहन पर फिल्में बननी शुरू हो गई हैं।
जब से इक़बाल कासकर हिन्दुस्तान आया है तब से उसको किसी ना किसी तरह अप्रत्यक्ष रूप से महिमा मंडित करने का प्रयास किया जा रहा है। आखिर कौन लोग है वह जो इस तरह का काम कर रहे हैं ? इसकी जांच तो अब ज़रूर होगी। इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि कहीं पिछली सरकार ने एक साज़िश के तहत तो इक़बाल को हिन्दुस्तान में आयात नहीं किया है क्योंकि सभी जानतें हैं कि दाऊद की रियल एस्टेट में काफी बड़ी हिस्सेदारी है।
अब पुलिस रिमांड में इक़बाल कासकर किस किस राजनीतिक आकाओं का नाम सामने लाता है यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि बिना राजनीतिक सहायता के ना तो दाऊद बड़ा हुआ था और ना ही इक़बाल कासकर इतना बड़ा हफ्तावसूली का नेटवर्क खड़ा कर सकता है। इसलिए जल्द ही हिन्दुस्तान की राजनीती के कुछ चेहरे बे नक़ाब होंगें , बस इंतज़ार कीजिये।
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