आखिर क्यों हर बार चर्चा में आते हैं संजय घरत और सुरेश पवार ?

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
आखिरकार फिर एक बार कल्याण डोम्बिवली मनपा में अवैध निर्माणों का मुद्दा उठने लगा है। इस बार विरोधी पक्ष नेता मंदार हलवे ने यह मामला उठाया है और सीधे तौर पर मनपा के अतिरिक्त आयुक्त संजय घरत तथा उपायुक्त सुरेश पवार को ही इन अवैध निर्माणों के लिए दोषी ठहराया है। अब सवाल यह बनता है कि पूरी मनपा में यह दोनों अधिकारी ही दोषी क्यों हैं ? इसका सीधे तौर पर जवाब है कि दोनों ही अधिकारी मनपा क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माणों को लगातार संरक्षण देते आये हैं। दोनों ही अधिकारियों ने जम कर इन अवैध निर्माणों से  ज़मीन जायदाद खरीदी है।
अपने आपको मनपा का दामाद समझने वाले संजय घरात पर शराब के नशे में मानपाडा की हद में हंगामा करने का आरोप भी लग चुका है , जबकि सुरेश पवार पर तो समय समय पर विभिन्न तरह के आरोप लगते  रहे हैं। संजय घरात का एक ही सपना है कि किसी भी तरह से मनपा के सहारे खूब सारी दौलत कमाई जाए और इस दौलत के सहारे मनपा आयुक्त बना जाए। सूत्रों पर यदि यकीन किया जाए तो हाल ही में संजय घरत ने डोम्बिवली पश्चिम में एक बंगला  खरीदा है। इस बंगले के बदले में संजय घरात ने कई अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया है। यदि सही तरीके से संजय घरत की संपत्ति की जांच की जाए तो पता चलेगा कि संजय घरत की २७ गाँव में बन रही कई इमारतों में भागेदारी है। बात सुरेश पवार की करें तो सुरेश पवार भी मनपा पर एक बोझ ही हैं। अवैध निर्माणों को पनपने से रोकने का जिम्मा सुरेश पवार पर है मगर सुरेश पवार इन अवैध निर्माणों को बढ़ाने और संरक्षण देने में ही ज्यादा रूचि दिखाते हैं। वरना गोलवली के नगरसेवक रमाकांत पाटिल जब अपने प्रभाग के अवैध निर्माणों की शिकायत करते हैं तो उन अवैध निर्माणों को ध्वस्त क्यों नहीं किया जाता ? मनपा क्षेत्र में हज़ारों अवैध निर्माण दिन रात हो रहे हैं। हालात तो यह है कि अब तो स्थानीय नगरसेवक भी इन अवैध निर्माणों के खिलाफ बोलने लगे हैं। लिखित शिकायतें भी होने लगे हैं। फिर भी कोई अधिकारी कुछ भी कदम नहीं उठाता है। इसकी साफ़ वजह है कि संजय घरात और सुरेश पवार जैसे अधिकारी इन अवैध निर्माणों को अपनी बप्पौती समझते हैं , इसी वजह से इन अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया जाता है। संजय घरात और सुरेश पवार मनपा में भी जनता की शिकायतों को सुनने के बजाए अवैध निर्माणकर्ताओं की बातों को ज्यादा सुनते हैं। इन दोनों अधिकारियों की अब हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि मनपा के अपने कनिष्ठ अधिकारियों को नगरसेवकों के खिलाफ जाती वाचक मामला तक दर्ज करवाने के लिए उकसाने लगे हैं। ताकि कोई भी इन दोनों सहित मनपा के किसी भी अधिकारी के खिलाफ ना बोल पाए।

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