आखिर शाह ने क्या गलत कहा ?

कर्ण हिन्दुस्तानी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुंबई में भाजपा की वर्षगांठ पर विपक्ष के लिए जो शब्दों का प्रयोग किया वह देश की राजनीतिक पार्टियों के लिए भले ही मुद्दा बन गया हो, मगर अमित शाह ने जो कुछ भी कहा वह आज के विपक्ष के लिए एक दम सही उपमा है। आज के राजनीतिक दौर में पूरा विपक्ष मोदी के विरोध में एकजुट हो रहा है। अपनी गिरती हुई साख को बचाने के लिए विपक्ष का एकजुट होना बाढ़ में सभी तरह के जानवरों का एकजुट होने के सामान ही है। सभी जानते हैं कि एक समय में मायावती के साथ मुलायम सिंह यादव के गुंडों ने क्या किया था ? मायावती भी जानती हैं कि अगर उस वक़्त बीजेपी के दबंग नेता ने मायावती को बचाया नहीं होता तो क्या हो जाता। आज मायावती सबकुछ भुला कर मुलायम का साथ देने को तैयार है , तो इसको क्या कहा जाए ? क्या मोदी जी मुलायम के गुंडों से भी ज्यादा खतरनाक हैं ? देश हित की बात करने वाले नरेंद्र मोदी जी ने और अमित शाह ने कभी  कोई अप्रत्याक्षित बात  नहीं की है। हर बात को तौल कर ही बोला जाता है। ममता बनर्जी और वाम पंथी एक दूसरे के बरसों से बैरी हैं मगर आज बीजेपी के खिलाफ वह भी एक मंच पर आने को तैयार हैं ! यह राजनीतिक मित्रता नहीं तो और क्या है ? खुद को देश का हितैषी बताने वाली कांग्रेस भी इन सभी की जमात में शामिल हो गई है। पराजय के भय से विपक्ष वह गठबंधन करने जा रहा है जिस गठबंधन में सभी प्रधानमंत्री बनने के इच्छुक हैं। मुलायम , मायावती , ममता और वाम पंथी सभी तो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होना चाहते हैं। विपक्ष आज यदि जनता के प्रति वफादार होने का नाटक कर रहा है तो यह नाटक , यह गठबंधन बे मेल है। मेरी नज़र में तो विपक्ष की मानसिकता उन कुत्तों की तरह है जो जंगल के राजा शेर का शिकार करने की योजना बनाते हैं और बड़ी संख्या में एक जुट होकर शेर का इंतज़ार भी करने लगते हैं मगर जब शेर की दहाड़ सुनायी देती है तो सभी कुत्ते दुम दबाकर भागने में ही भलाई समझते हैं।  नरेंद्र मोदी जी की लोकप्रियता की बाढ़ से बचने के लिए ही विपक्ष एक होना चाहता है।  जिसकी परिभाषा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सभी के सामने बता दी। अब विपक्ष को दर्द होने लगा है , उनकी तुलना जानवरों से की गई है , राहुल गाँधी जैसा राजनीती का कच्चा खिलाड़ी भी इस मुद्दे पर बोलने से पीछे नहीं हट पा रहा है। मायावती तो खैर मायावती ही हैं , उनको तो लिखा हुआ ही पढ़ने की आदत है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की चूलें हिलने की आहट ममता को सुनायी देने लगी है , तभी तो वह भी बोलने लगी है। कुल मिलाकर अमित शाह ने जो भी कहा है वह सच ही है और विपक्ष सच को पचा पाने में असमर्थ है।  
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