आज का मनसे द्वारा रेल रोको आंदोलन प्रासंगिक कैसे??

(राजेश सिन्हा)

अभी 2 दिन पूर्व ही विभिन्न TV समाचार चैनलों में कहीं टमाटर को वाहन से रौंदते हुए दिखाया गया तो कहीं एक किसान अपने गोभी के खेत को कुदाल से तहस-नहस करता हुआ दिखा। कारण किसानों को अपने सब्जियों का उचित मूल्य नहीं मिलना बताया गया।आज मंगलवार सुबह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बैनर तले उतरे सैकड़ों रेलवे के प्रशिक्षणार्थी छात्रों ने माटुंगा रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया, जिससे पूरी मुंबई ठप हो गई।

केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद सेे लोगों में इतनी उग्रता कहां से आ गई यह समझ से परे है कहीं कोई बात नहीं सिर्फ अपनी उल जुलूल मांगों के लिए सीधे सड़क पर उतर जाना, उग्रता दिखाना,तोड़-फोड़ करना, सरकारी संपत्तियों का नुकसान पहुंचाना,यह आम बात हो गई। यह सिलसिला एक दो बार हो तो इसे संयोग माना जा सकता है, लेकिन हर 15 दिन 1 महीने पर ऐसे आंदोलन लगातार होने से यह साफ दिख रहा है कि इन आंदोलनों के पीछे जो लोग है उन्हें केंद्र और राज्य में भाजपा की सत्ता रास नहीं आ रही है.

कुछ दिन पूर्व भीमा कोरेगांव के बाद पूरे महाराष्ट्र में हुए उग्र आंदोलन और चार-पांच दिन तक पुरे महाराष्ट्र को ठप्प कर देने के पीछे किसका हाथ था यह सब विषय पर कोई नहीं जाना चाहता। इससे पहले भी किसानों की कर्ज माफी या फिर किसानों की आत्महत्या को मुद्दा बनाकर भी राज्य भर में लगातार हंगामा हो रहा है

ऐसे में सवाल यह उठता है सालों से राज्य में शासन करने वाली कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार में क्या यह परिस्थितियां नहीं थी ? क्या कभी कांग्रेस की सरकार ने किसानों को कर्जमाफी देने के बारे में सोचा?? उनके द्वारा लगातार आत्महत्या करने की बात पर कभी कोई इस समस्या को जड़ से मिटाने की योजना पर काम किया गया ??  ऐसे कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं

कांग्रेस की सरकार में सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ जबकि राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ईमानदारी से किसानों की समस्या सुलझाने का प्रयास कर रही है राज्य में समन्वय बना रहे इसीलिए हर समय प्रयासरत है विरोधियों को कहीं से कोई सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं मिल रहा है तो बस इस सरकार को कैसे अच्छे कामों के लिए रोका जाए कैसे इन्हें कोई भी विकास का काम नहीं करने दिया जाए विरोधी बस इसी ताक में है.और इसीके परिणाम है ये आन्दोलन.

अन्यथा घटना पुणे के पास स्थित भीमा कोरेगांव में हो और पूरा महाराष्ट्र जल उठे इसके पीछे किसी सुनियोजित दिमाग का ना होना माना नहीं जा सकता आश्चर्यजनक रूप से इस में आम नागरिकों की सहभागिता भी समझ से परे है राज्य में कानून व्यवस्था लागू हो, हर तरफ सुख शांति और समृद्धि हो, हर नागरिक को अपना घर हो, अपना रोजगार हो,राज्य की भाजपा सरकार निरंतर प्रयासरत है और ये बात इसकी विभिन्न योजनाओं से यह साफ पता चलता है की राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार इन बातों के लिए गंभीर है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से और अनपेक्षित ढंग से हर 15 दिन महीने में राज्य के किसी हिस्से से ऐसा मुद्दा उठता है जिससे पूरे महाराष्ट्र का विकास प्रभावित हो जाता है।

ऐसे मुद्दे उठा कर, ऐसे आंदोलन कर, ऐसे राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान कर, विरोधी दल अगर  राज्य की सत्ता में दुबारा आना चाहता है  तो यह उनका दिवास्वप्न ही साबित होगा क्योंकि केंद्र और राज्य में विरोधी दल कांग्रेस और उसके सहयोगी के भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण ही आम जनता ने केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा समर्थकों की सरकार बनाई थी

आज आम नागरिक देख रहा है इन आंदोलनों और उग्र प्रदर्शन के पर आम नागरिक की पैनी नजर है और विरोधी दल को इसका खामियाजा अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बैनर तले रेलवे के प्रशिक्षणार्थी छात्रों द्वारा माटुंगा रेलवे स्टेशन पर उन्हें रेलवे में परमानेंट करने की मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन किया गया. आंदोलन 4 घंटे तक चला,पूरा , मुंबई की लोकल सेवा बंद होने से पूरी मुंबई ठप हो गई आंदोलनकारियों की मांग थी कि उन्हें रेलवे में परमानेंट नौकरी दिया जाए

ज्ञात हो कि वह रेलवे हर वर्ष इच्छुक छात्रों को प्रशिक्षणार्थी के तौर पर अपने यहां रखता है और उन्हें उचित मानधन भी देता है यह प्रशिक्षार्थी को यह फायदा रहता है कि जब रेलवे बोर्ड के तरफ से रेलवे में भर्ती परीक्षा होती है तो इन प्रशिक्षार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है रेलवे बोर्ड इन प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण देने के दौरान परमानेंट नौकरी देने की गैरंटी कभी नहीं देता है रेलवे की तरफ से यह उपक्रम पूरे  देश के रेलवे जोन द्वारा चलाया जाता है ऐसे में मनसे के बैनर तले आज आंदोलन करने वाले छात्रों को रेलवे बोर्ड ने परमानेंट नौकरी देने की हामी भर दी तो पूरे देश में से यह मांग उठने लगेगी आंदोलन कर्ताओं को इन स्थितियों का पूरा ध्यान है लेकिन सिर्फ अपने नेतागिरी चमकाने के मनसे नेताओ द्वारा इन छात्रो के माध्यम से पूरे मुंबई को  4 घंटों के लिए रोक देना पूरी तरह से अव्यवहारिक है।

 

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