आज नोट बंदी की सालगिरह..

(कर्ण हिंदुस्तानी )
मोदी सरकार ने आज से ठीक एक साल पहले रात को देश भर में हज़ार और पांच सौ के चलन वाले नोट बंद करने का ऐलान किया था। अचानक लिए गए इस फैसले को कई लोगों ने सही बताया तो कई लोगों ने सरकार का मूर्खता पूर्ण निर्णय बताया। जबकि सभी जानते हैं कि मोदी सरकार का यह निर्णय सौ फीसदी सही था। देश भर में दबाकर रखे गए हज़ारों करोड़ रूपये बैंकों में जमा हुए।  लगभग ९९ फीसदी नोट रिज़र्व बैंक में वापस आ गए। काला धन बाहर निकालने के लिए गए इस प्रयास को केवल उन लोगों ने नकारना और बदनाम करना शुरू किया जिन लोगों के पास अकूत काला धन था। आज स्थिति यह है कि आप बाज़ार में दो हज़ार रूपये का नोट लेकर जाइये आपको किसी भी दूकान से दो हज़ार का छुट्टा मिल जाएगा , जबकि पहले हालात यह थे कि बाज़ार में पांच सौ का भी छुट्टा मिलना मुश्किल था। यानी कि कुछ लोगों ने भारतीय कर्रेंसी को दबाकर रखा था। लोगों ने दिहाड़ी पर मज़दूरों को नोट बदली करवाने के लिए बैंकों की कतार में खड़ा किया था। इस दौरान कुछ लोगों की मृत्यु भी हुई। मगर सच्चाई यह है कि काला धन रखने वालों की वजह से ही कुछ लोगों की मृत्यु हुई थी। कई राजनीतिक हस्तियों ने बैंक कर्मचारियों को लालच देकर अपने काले धन को सफ़ेद करवाया। जिसकी वजह से कुछ बैंकों को केंद्र सरकार ने नोटिस भी भेजा है। ऐसे बैंकों को भविष्य में बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मोदी सरकार का निर्णय हर हाल में सही था मगर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने भ्रामक सन्देश भी वायरल किये। लोगों को दिग्भ्रमित करने के सारे प्रयास विपक्ष ने किये। अब नोट बंदी के एक साल बाद लोगों को पता चलने लगा है कि मोदी सरकार का निर्णय एक दम सही था। अतः नोट बंदी की पहली सालगिरह पर जिनको काला दिवस मनाना है वह मनाएं , हम तो सरकार को बधाई ही देंगे।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email