कल नागालैंड विधानसभा चुनाव में यहाँ के प्रमुख बाप्टिस्ट चर्च का विवादित ऐलान,भाजपा को वोट ना करे इसाई.

नगालैंड देश का ऐसा राज्य है जिसकी 90 फीसदी से ज़्यादा आबादी ईसाई है. ज़ाहिर है कि नागाओं के इस राज्य में चर्च की राय आम ज़िंदगी मे भी ज़्यादा मायने रखती है और राजनीति में भी.27 फ़रवरी को होने जा रहे विधानसभा चुनावों में चर्च की ही एक राय की वजह से राजनीतिक भूचाल-सा आ गया है.

नगालैंड की 1500 से ज़्यादा चर्चों की मुख्य संस्था कही जाने वाली ‘नगालैंड बाप्टिस्ट चर्च काउन्सिल’ के जनरल सेक्रेटरी रेव्हरंड डॉ झेल्हू किहो ने 1 फ़रवरी को एक खुला खत लिखकर बीजेपी, आरएसएस और हिंदुत्व की विचारधारा पर हमला कर दिया.

कथित तौर पर उनके खत में लिखा है, “आरएसएस का राजनीतिक संगठन भाजपा जब से देश में सत्ता में आया है तब से हिंदुत्व की ताकत बढ़ी है और उसका रूप आक्रामक हो गया है. आप आम आदमी को कितना भी समझाने की कोशिश करो इसे नकारा नहीं जा सकता. आप इससे भी इनकार नहीं कर सकते कि केंद्र में सत्तासीन ये पार्टी पूरी ताकत से ईसाई बहुल नगालैंड में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है. क्या आपने यह सोचा है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या है? अगर नहीं सोचा है, तो बेवकूफ़ ना बनें.’

नगालैंड में चर्च बीजेपी के ख़िलाफ़ है और उसे वोट ना करने की सलाह दे रहा है- इस मायने से राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है.

भाजपा इस चुनाव में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके निफ़्यू रियो की पार्टी एनडीपीपी के साथ गठबंधन में है और 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर रही है.

रेव्हरंड किहो कहते हैं, “. मैंने कहा है कि भाजपा आरएसएस की राजनीतिक शाखा है और वो सांप्रदायिक पार्टी है. पूरा देश इसका अनुभव कर पा रहा है. और चर्च में हमें यह लगा की हमारे लोगों को आगाह करना हमारी ज़िम्मेदारी है. जो अन्य प्रदेशों में हो रहा है वो नगालैंड में भी आ सकता है.”

 

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