केंद्र सरकार ने  मॉब लिंचिंग पर जताई चिंता, किया हाई लेवल कमेटी का गठन

केंद्र ने भीड़ द्वारा पीट पीटकर की जाने वाली हत्याओं (मॉब लिंचिंग) को रोकने के लिए कदम उठाने के संबंध में केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और चार हफ्ते के अंदर अनुशंसाओं को पेश करने का निर्देश दिया है. इस समिति के सदस्य न्याय, कानूनी मामले, सामाजिक न्याय व आधिकारिता विभाग के सचिव होंगे.

समिति को दिया 4 सप्ताह का समय
गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, “मॉब लिंचिंग की घटनाओं का सामना करने के लिए उचित कदम उठाने के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और चार हफ्तों के अंदर अनुशंसाओं को पेश करने को कहा है.” सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिह की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह (जीओएम) का भी गठन किया, जो समिति की अनुशंसाओं को देखेगा.

4 जुलाई को ग्रह मंत्रालय ने जारी किया था परामर्श
जीओएम के सदस्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत होंगे. जीओएम अपनी अनुशंसा को प्रधानमंत्री को सौंपेगा. गृह मंत्रालय ने 4 जुलाई को एक परामर्श जारी किया था, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हिंसा और लिंचिंग को रोकने के लिए कदम उठाने के लिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा गया था. बयान के अनुसार, राज्यों को 17 जुलाई को जारी सर्वोच्च न्यायलय के दिशा-निर्देशों को लागू करने के आदेश दिए गए थे.
केंद्र ने भीड़ द्वारा पीट पीटकर की जाने वाली हत्याओं (मॉब लिंचिंग) को रोकने के लिए कदम उठाने के संबंध में केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और चार हफ्ते के अंदर अनुशंसाओं को पेश करने का निर्देश दिया है. इस समिति के सदस्य न्याय, कानूनी मामले, सामाजिक न्याय व आधिकारिता विभाग के सचिव होंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
देश के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ रही मॉब लिचिंग की घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जाहिर की थी. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इसके लिए दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश जारी किए थे. याचिका में कहा गया था मॉब लिंचिंग के लिए कानून में किसी तरह का प्रावधान नहीं है, इसलिए इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं.

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