कोरेगाव जैसी साजिशो के पीछे कौन है इसकी जाँच होनी चाहिए ??

चाहे किसान कर्ज माफी का मामला हो या फिर कोरेगांव का मामला हो हर तरफ एक बात साफ़ दिखती है कोई घटना एक जगह होती है और इसकी प्रतिक्रिया पूरे महाराष्ट्र में देखी जाती है अभी कल ही कोरेगाव में हुई घटना की प्रतिक्रिया पूरे राज्य में देखी जा रही है हर तरफ से विरोध प्रदर्शन हो रहा है राज्य भर में उग्रता अपनी चरम सीमा पर है ठीक इसी तरह का आंदोलन किसान कर्जमाफी के समय पर हुआ था किसान आंदोलन तो बढ़ते-बढ़ते पास के मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया था और कोरेगांव का मामला पर भी कल परसों में देश के अन्य भागों से प्रतिक्रिया आने लगे तो आश्चर्य नहीं होगा

राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार को इस पर एक बार आत्ममंथन करने की जरूरत है कौन सी ताकत है जो योजनाबद्ध ढंग से ऐसे मुद्दों का इंतजार में रहता है और ऐसे संवेदनशील मुद्दों को राज्य भर में कैसे तीव्रता प्रदान की जाए इसी फ़िराक में रहता हैं किसान आंदोलन ने भी राज्य की फडणवीस सरकार को ऐसे ही पसोपेश में डाल दिया था हर रोज किसान सड़कों पर दूध बहा रहे थे सब्जियां फेंक रहे थे और उग्रता दिखा रहे थे और आज भी कोरेगांव मामले में लगभग 3 लाख लोगों की भीड़ में जाकर पत्थरबाजी करना फिर इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप राज्य भर में उग्र विरोध प्रदर्शन इन सब के पीछे कौन है कही ये सोंची समझी रणनीति के तहत तो नहीं हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए

राज्य सरकार के साथ हर बुद्धिजीवी यह जानता है कि यह सब साजिश मेहनत कश लोग नहीं कर सकते. हर समाज में बुद्धिजीवी वर्ग रहता है और ऐसे समय में वह अपने समाज का मार्गदर्शन कर इन परिस्थितियों में सही राह दिखा सकता हैं.

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