गुजरात,उड़ीसा,मध्यप्रदेश,झारखंड की तर्ज पर सभी राज्यों में धर्मांतरण पड कड़े कानून की आवश्यकता.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के झारखंड दौरे के पूर्व संध्या पर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्विटर पर ट्वीट करके यह जानकारी दी है कि उन्होंने राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं जबरन धर्मांतरण करवाने वाले के लिए झारखंड सरकार ने नया और कड़ा कानून बनाया है यदि कोई धोखे से या जबरन धर्म परिवर्तन करवाता है तो यह गैरकानूनी होगा और इस आरोप में दोषी पाए गए दोषियों को 4 वर्ष की  कारवास का प्रावधान इस कानून में किया गया है

धर्मांतरण देश में कांग्रेसी शासन में प्रभावित और आज देश के हर कोने में ईसाई मशीनरी सेवा के नाम पर प्रलोभन  देकर या फिर धोखे से धर्मांतरण करवा रहे हैं कहीं  नगद पैसे जिए जा रहे हैं, वहीं कहीं नौकरी का प्रलोभन देकर या फिर बच्चे की शादी का प्रलोभन देकर धर्मान्तरित  किया जाता रहा है.

संसद में पहली बार इस मुद्दे को वर्ष 1954 में उठाया गया था। उस समय इस बिल का नाम भारतीय धर्मांतरण (नियम और पंजीकरण) विधेयक। इस बिल को वर्ष 1960 में फिर से संसद में उठाया गया। अल्‍पसख्‍ंयकों के विरोध की वजह से इस बिल का समर्थन नहीं मिल सका और यह बिल पास नही हो पाया.

वर्ष 1968 में ओडिशा और मध्‍य प्रदेश में इससे जुड़े कडे नियम बनाए गए। इन नियमों को मध्‍य प्रदेश धर्म स्‍वतंत्रता अभियान और ओडिशा फ्रीडम ऑफ रिलीजियन एक्‍ट के नाम से जाना गया। इन कानूनों के तहत किसी को भी जबर्दस्‍ती उसके धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता था सिर्फ उनकी आस्‍था के बाद ही यह कदम वैध माना गया।
इसके बाद तमिलनाडु और गुजरात में भी इन्‍हीं नियमों को लाया गया।
इन राज्‍यों में धर्मांतरण करवाने वालो के विरुद्ध आईपीसी के तहत दंडात्‍मक कारवाई का प्रावधान किया गया है.इसके तहत जबर्दस्‍ती धर्मांतरण में तीन वर्ष की जेल और 20,000 रुपए का जुर्माना भी तय किया गया।

ऐसे ही कड़े कानून की ज़रूरत महाराष्ट्र के साथ देश के सभी राज्यों में है.

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