गुजरात चुनाव और कांग्रेस की गंदी राजनीती !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
हर मोर्चे पर अपनी बेइज़्ज़ती करवाने वाली कांग्रेस ने गुजरात चुनावों के मद्देनज़र फिर एक बार राजनीती के गिरते स्तर की मानसिकता वाली राजनीती करनी शुरू कर दी है। हार्दिक पटेल और उसके चमचे नरेंद्र पटेल को अपनी गोदी में बैठा कर कांग्रेस समझ रही है कि उसने कोई बहुत बड़ा तीर मार लिया है तो यह कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी की विकृत मानसिकता का ही प्रतीक है। कोई एक आदमी उठता है और मीडिया के सामने नोटों का बंडल दिखाते हुए कहता है कि यह बीजेपी ने मुझे खरीदने की पेशगी दी है , बाकी की रकम बाद में दी जाएगी।  कांग्रेस की मंडी के दलालों को इतना भी नहीं पता कि मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए एक बार तीन तीन करोड़ रूपये और पेट्रोल पंप के आश्वासन दिए गए थे। कांग्रेस के प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव के घर पर हर्षद मेहता एक करोड़ रुपयों से भरा बैग लेकर पहुंचा था। आज के ज़माने में एक करोड़ की रकम से किसी को खरीदने का मतलब है कि किसी गली छाप छुटभैय्ये नेता को खरीदना। कांग्रेस की घटिया राजनीती को समझ ना पाने वालों को समझ आना चाहिए कि किसके कंधे पर रख कर कौन निशाना साध रहा है ? गुजरात में मोदी जी का विकास कार्य बोल रहा है कोई मंडी नहीं लगी है गुजरात में। अगर नरेंद्र पटेल के पास कोई सबूत है तो वह पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों पेश नहीं किया गया ? असल में सच्चाई यह है कि कांग्रेस और उसकी मंडी के दलाल बन चुके हार्दिक पटेल बीजेपी की ताक़त को देख कर बौखलाए हुए हैं और इसी वजह से किसी भी तरह के इलज़ाम लगाकर बीजेपी को बदनाम करने में लगे हैं। दरअसल यह सब एक सोची समझी राजनीती के तहत किया जा रहा है। कांग्रेस के जोकरनुमा उपाध्यक्ष राहुल गाँधी अभी भी परिपक्व नहीं हुए हैं , अभी  उन्हें राजनीती का बोर्नविटा पीने की सख्त ज़रुरत है। गुजरात की जनता विकास मॉडल को समझती है और इसका परिणाम चुनावों के बाद सबके सामने ही होगा। इसके लिए बीजेपी को किसी को खरीदने की ज़रुरत नहीं है।
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