गेंडे की चमडी वाले कल्याण डोम्बिवली मनपा के भ्रष्ट अधिकारियों पर क्या कोई कारवाई संभव है ??

कल्याण डोम्बिवली मनपा के सोमवार को हुई महासभा में सभी दलों के नगरसेवको ने अपने अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के विरुद्ध एकमत से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमे अवैध निर्माण के लिए मुख्य रूप से मनपा के सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को दोषी माना है और इन्हें यथाशीघ्र सेवे से निलंबित कर इनकी जांच कर इन्हें कल्याण मनपा सेवा से हमेशा के लिए निष्काषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया. कल्याण मनपा में दो दिन पूर्व ही अपना पदभार सम्भालने वाले मनपा आयुक्त गोविन्द बोरके के लिए ये सब नया अनुभव था.और उनकी तरफ से सभी विषयों का अध्यन कर उचित कारवाई किये जाने की बात आयुक्तालय सूत्रों ने दी है.

लेकिन जहा एक तरफ मनपा के बहुसंख्य नगरसेवक अपने अस्तिव की लड़ाई लड़कर अवैध निर्माण के लिए पिछले कुछ दिनों से पुरे राज्य में चर्चित कल्याण डोम्बिवली की छवि सुधारने में लगे है वहि विभिन्न दलों के नगरसेवक का एक गुट ऐसा भी है जो मनपा अधिकारियों  को सरेआम मदद कर रहा है.

ज्ञात हो की कल की सभा में भाजपा और शिवसेना के वरिष्ठो ने अपने नगरसेवको को सख्त निर्देश दिए थे की महासभा में कोई भी सदस्य मनपा अतिरिक्त आयुक्त और अवैध निर्माण प्रभारी संजय घरत और उपायुक्त सुरेश पवार का नाम का जिक्र नही करेगा.बावजूद इसके पार्टी व्हिप को नह्कारते हुए अनेको ने ना सिर्फ इन दोनों का नाम लिया वल्कि इन्हें बर्खास्त करने की भी मांग की.अनेक नगरसेवको के अनुसार उन्हें अपने वार्ड की समस्या सुलझाने में कोई वरिष्ठ सहयोग नहीं करता है.अवैध निर्माण के अलावा अपने वार्ड की समस्या लेकर ये नगरसेवक जब इन अधिकारियों के पास जाते है तो कोई सुनवाई नहीं होती है.अनेक नगरसेवको के अनुसार मनपा के ये भ्रष्ट अधिकारी गेंडे की चमड़ी के हो गए है.इनको कोई फर्क नही पड़ता है.इनपर सीधे मनपा सेवे से बर्खास्तगी ही एकमात्र इन्हें सबक सिखाने जैसी कारवाई होगी.

सोमवार की महासभा में भाजपा के एक सदस्य को अपने वार्ड में हो रहे अवैध निर्माण और अधिकारियों के विरुद्ध स्थगन प्रस्ताव देना था.उक्त नगरसेवक/नगरसेविका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की स्थगन प्रस्ताव के लिए सूचक और अनुमोदक ऐसे दो सदस्यों के हस्ताक्षर लगते है.उन्होंने इसके लिए अपने एक दर्जन से अधिक अपने के पार्टी नगरसेवको से सम्पर्क किये सबने सिरे से इन्कार कर दिए.सबके एक ही बोल थे वरिष्ठो ने ऐसे किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं करने के आदेश दिए है.

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