गोरखधंधे में माहिर है उल्हासनगर की कोणार्क कंपनी !

(स्वदेश मालवीया )
उल्हासनगर शहर को जितना अब तक  शहर के नेताओं ने लूटा है उससे भी ज्यादा कोणार्क वालों ने पिछले चंद सालों में लूट लिया है। विभिन्न ठेकों के जरिये मनपा की तिजोरी को लूट कर खुद का बैंक खोलने वाली कोणार्क कम्पनी ने अब इस बैंक के जरिये शहर के व्यापारियों को भी लूटना शुरू कर दिया है। जिससे कोणार्क कंपनी का काला चिट्ठा सामने आने लगा है।
आठ दस लोगों की एक टीम कोणार्क कंपनी बनाती है और उल्हासनगर मनपा का चुंगी वसूलने का ठेका अपने नाम कर लेती है। बाकी सभी की निविदाएं ठुकरा कर मनपा के और मंत्रालय के कुछ अधिकारीगण कोणार्क को ठेका दे देतें हैं। इसके बाद कोणार्क की हिम्मत बढ़ती है , वह उल्हासनगर मनपा क्षेत्र की साफ़ सफाई का ठेका भी हथिया लेती है। बाद में शहर की सड़कों के नीचे पाइप लाइन बिछाने का भी ठेका कोणार्क को मिल जाता है। मनपा को करोड़ों रूपये की कथित चपत लगाने के बाद कोणार्क कंपनी अपना बैंक खोल देती है। इस कोणार्क कंपनी में अन्नू मनवानी , महेश अग्रवाल (रेजेंसी ग्रुप ),नन्द जेठानी , रमेश मखीजा सहित आठ दस लोग जुड़े हुए हैं।
 यदि कोणार्क कंपनी की तह तक जाया जाए तो कोणार्क ने एक भी सरकारी काम ठीक ढंग से शर्तों के अनुसार पूरा नहीं किया है। मगर कोणार्क  अर्थ नीति के बल पर कोणार्क को आज भी सरकारी बाबू सलाम ठोकते हैं। अब बात करें कोणार्क के बैंक की तो इस बैंक में क्या गोरखधंधा चलता है वह उल्हासनगर के मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन में दर्ज़ शिकायत से पता चलता है। रमेश मखीजा पर जो प्राथमिकी दर्ज़ हुई है। वह हज़ार – लाख के घोटाले की नहीं बल्कि २५ करोड़ रुपयों की प्राथमिकी दर्ज़ की गई है। बैंक में ओवरड्राफ्ट के लिए जमा किये गए कागज़ात का गलत इस्तेमाल कर रमेश मखीजा २५ करोड़ की रकम उठा ली। इस मामले में कोणार्क अर्बन को ऑपरेटिव बैंक के संचालकों ने मामूली कार्रवाई करते हुए रमेश मखीजा को सी ओ से हटाया है , जबकि कोणार्क को खुद पहल करते हुए रमेश पर धोखधड़ी का मामला दर्ज़ करवाना चाहिए था। इससे पता चलता है कि २५ करोड़ की रकम में सबकी मिलीभगत है।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email