डोम्बिवली निवासी रहे भैय्या जी जोशी चौथी बार बने राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह

(कर्ण हिंदुस्तानी)
नागपुर में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में लगातार चौथी बार सुरेश (भैय्या जी ) जोशी को संघ का सरकार्यवाह चुने जाने की घोषणा की गई। ७१ वर्षीय भैय्या जी जोशी के नाम की घोषणा संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने की।
मूलतः इंदौर के रहना वाले भैय्या जी जोशी बचपन से ही संघ के स्वयं सेवक रहे हैं। भैय्या जी जोशी के साथ शुरू से ही रहने वाले श्रीपाद जोशी के अनुसार भैय्या जो जोशी १९७० से १९७५ तक महाराष्ट्र के ठाणे जिला स्थित डोम्बिवली शहर के रामनगर क्षेत्र में रहे और डोम्बिवली में रहते हुए मुंबई विश्वविद्यालय से उन्होंने ग्रेजुएशन पूरी की।वे अपने बड़े भाई के साथ पढने यहाँ डोम्बिवली में रहने आये थे ग्रेजुएशन के बाद भैय्याजी जी जोशी ने तकरीबन दो साल नौकरी की और फिर नौकरी से त्याग पत्र देकर भैय्या जी जोशी संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।

संघ प्रचारक बनने के बाद संघ में उनका कार्य क्षेत्र थाणे जिला ही था. उस दौरान ठाणे जिले के कल्याण , तलासरी , पालघर , वाड़ा – मोखाडा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में सेवाभावी संस्थाओं के कार्यों में भैय्या जी जोशी की प्रमुख भूमिका रही। बाद में ठाणे के पश्चात १९८२ से १९८९ तक भैय्या जी जोशी नासिक विभाग के विभाग प्रचारक रहे। उनके साथ उस दौरान डोम्बिवली निवासी अभी के कोकण प्रान्त सम्पर्क प्रमुख श्रीपाद जोशी भी संघ के प्रचारक के तौर पर नासिक में ही कार्यरत रहे है ।

१९९३ में महाराष्ट्र के लातूर जिला में आये भूकंप के दौरान भैय्या जी जोशी संघ के महाराष्ट्र प्रान्त सेवा कार्य के प्रांत प्रमुख थे.उनकी देखरेख में लातूर में चले संघ के सेवा कार्य का उदाहरण पुरे विश्व में दिया जाता है. इसके पश्चात भैय्या जी जोशी ने लातूर के भूकंप में बर्बाद हुए रीवर्ड चिंचोली नामक गाँव गोद लेकर उसे बसाया। सन २००० में गुजरात के भुज में आये भूकंप के समय भी भैय्या जी जोशी संघ के राष्ट्रीय सेवा कार्य प्रमुख थे।और भुज में भी भूकंप के बाद संघ द्वारा चलाये गए सेवा कार्य का कुशल नेतृत्व किया.

भैय्या जो जोशी के डोम्बिवली में संघ की शाखाओं में सक्रियता के दौरान श्रीपाद जोशी बाल शाखा में जाते थे. और आज वे संघ के  कोकण प्रांत सम्पर्क प्रमुख की जिम्मेदारी सम्भाल रहे है. श्रीपाद जोशी के अनुसार  ज़िंदगी के ७१ बसंत देख चुके भैय्या जो जोशी की ऊर्जा को देख कर युवाओं को नयी स्फूर्ति मिलती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि ७१ वर्ष की उम्र में भी भैय्या जी जोशी उनके सम्पर्क में रहे संघ के सभी छोटे और बड़े स्वयं सेवकों को उनके नाम से पहचानते है और युवाओं वाले जोश के साथ संघ का काम कर नये स्वयं सेवको के लिए प्रेरणादायी है.

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