निजी अस्पताल अब अपने यहाँ तोड़फोड़ होने के बावजूद,मामला सेटेल करने लगे है.

अस्पतालों में मरीज की मृत्यु होने पर उनके परिजनों द्वारा अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट या फिर अस्पताल में तोड़फोड़ की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है 4 दिन पूर्व तक मुंबई के प्रसिद्ध जे जे अस्पताल में मरीज की मृत्यु होने पर उसके परिजनों ने इस अस्पताल के डॉक्टरों से जमकर मारपीट की थी जिस के विरोध में मुंबई के अनेक अस्पतालों ने 4 दिनों तक काम बंद आंदोलन किया था.और राज्य सरकार द्वारा जल्द ही इसके लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम के आश्वासन के बाद यह हड़ताल खत्म हुआ था.

यह बात थी सरकारी अस्पतालों की लेकिन यहां के निजी अस्पतालों में स्थिति कुछ अलग हैएक तरफ सरकारी अस्पातालो के डाक्टर अपनी एकजुटता दिखाते हुए प्रशासन को अपनी मांगे मनवाने पर मजबूर कर देते है वहिअनेक अनेक ताम झाम और एक दिन के ही मरीजो से हाई फाई इलाज के नाम पर लाखो रुपये वसूलने वाले यहाँ के निजी अस्पताल के मालिक ये डाक्टरो से अगर कोई गलती हो जाती है या इन डॉक्टरों की लापरवाही से किसी मरीज की मौत होजाती है तो उसके बाद इन्हें ना सिर्फ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़  झेलना पड़ता  है बल्कि उन्हें मरीजों से लाखों रुपए जमा किए गए फ़ीस भी वापस लौटाने  पडता हैं

घटना उल्हासनगर के प्रसिद्ध सत्य साईं प्लैटिनम हॉस्पिटल की है जहां 50 वर्षीय महिला मरीज गंगूबाई निकम का किडनी स्टोन का ऑपरेशन हुआ था ऑपरेशन ठीक-ठाक हुआ था और ऑपरेशन के दूसरे दिन अचानक मरीज गंगूबाई कदम का निधन हो गया इससे  मृतक महिला मरीज के परिजनों ने अस्पतालों में जमकर तोड़फोड़ की और डॉक्टरो पर हमले की भी कोशिश की. और मरीज के परिजनों के उग्र रूप देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उनका पूरा फीस के रूप में वसूला हुआ पैसा वापस कर दिया.

अस्पताल मैं हुए इस तोड़फोड़ और मारपीट की सूचना स्थानीय पुलिस को भी मिल गई थी लेकिन जब पुलिस अस्पताल प्रबंधन से मिला तो डॉक्टरों ने मरीज से सब सेटलमेंट हो जाने की बात कही और अपनी कोई शिकायत नहीं होने की बात पुलिस में दर्ज की.

ठीक इसी तरह की घटना डोंबिवली के गांधीनगर स्थित एक नामी अस्पताल में भी १५ दिन पूर्व ही घटित हुई थी जहां एक 22 वर्षीय युवती की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी मृतक लड़की के परिवार वाले भी अपनी ऊंची पहुंच रखते थे और इस मामले में शिवसेना के एक बड़े नेता ने मृतक के परिवार वालों को पूरा सहयोग दिया था उस दौरान ही उक्त अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ था चार-पांच दिन तक इस अस्पताल के सभी डॉक्टर फरार थे लेकिन अज्ञात कारणों से यह सब मामला सेटल हो गया और इस मामले की भी कोई पुलिस शिकायत नहीं हो पाई.

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