प्रणब दा के बहाने !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक कार्यक्रम में जाने की तैयारी कर रहे हैं और कांग्रेस इस बहाने अपनी औकात दिखाने में लग गई है। कांग्रेस खुद को प्रणब मुखर्जी का मालिक समझने लगी है। भले ही पूर्व में प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के सिपहसालार रह चुकें हों लेकिन मौजूदा समय में प्रणब जी पूर्व राष्ट्रपति हैं और उनकी एक गरिमा है। उनको यदि आज भी कांग्रेस अपने इशारों पर नचवाने की सोच रही होगी तो यह कांग्रेस की नीच मानसिकता का ही उदाहरण माना जाएगा। क्या कांग्रेस खुद को देश के सबसे बड़े पद पर रह चुके व्यक्ति से भी बड़ा मानती है ? या फिर कांग्रेस यह मानती है कि हिन्दुस्तान  के पूर्व राष्ट्रपति कांग्रेस के एहसानों तले ता – उम्र दबे रहे ,  क्या कांग्रेस यह तय करेगी कि एक पूर्व राष्ट्रपति को किस कार्यक्रम में शिरकत करनी है किस में नहीं ? कांग्रेस को भले ही आज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा को ना मानती हो मगर कांग्रेस को यह भी नहीं भूलना चाहिए की गणतंत्र दिवस की परेड में एक बार खुद पंडित नेहरू ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की झांकी को प्रदर्शन की इज़ाज़त दी थी।  देश में यदि कोई संगठन निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य कर रहा है तो वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ही है। देश में कभी भी कहीं भी कोई आपदा आती है तो संघ के स्वयं सेवक सबसे पहले वहाँ पहुँचते हैं और अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने विपरीत परिस्थितियों में सेवा कार्य किया है।  आज़ादी से लेकर अब तक देश के पिछड़े  और  अति पिछड़े क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ कार्य कर रहा है।  वह भी बिना किसी स्वार्थ के।  संघ की शाखाओं में किसी  भी तरह का जाती सूचक भेद भाव नहीं किया जाता।  मातृभूमि की रक्षा का पाठ संघ की शाखा में पढ़ाया जाता है। कांग्रेस ने संघ की तर्ज पर ही सेवादल का गठन किया था। मगर इस सेवादल में सेवा कम और दल – दल ज्यादा हो गई।  नतीज़ा कांग्रेस सेवादल आज की तारीख में इतिहास में जमा हो गया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में यदि पूर्व राष्ट्रपति आतें हैं तो यह संघ की नीतियों का ही परिणाम है। संघ राजनीती नहीं करता बल्कि राजनीती का शुद्धिकरण करता है। इसलिए कोंग्रेसियों को प्रणब मुखर्जी की खिलाफत करने से पहले सोचना चाहिए कि वे अब कोंग्रेसी नहीं हैं जो मैडम के इशारे पर ता – ता – थैया करेंगे। कांग्रेस को पूर्व राष्ट्रपति के पद की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।
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