प्रधानमंत्री पर टिपण्णी के पहले राहुल गाँधी अपनी गिरेबान में झांकें तो बेहतर होगा। 

(कर्ण हिंदुस्तानी )
कांग्रेस के स्वयंघोषित अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की खराब सेहत को लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी जी अपने गुरु अटल बिहारी वाजपेयी को भूल गए हैं। राहुल गाँधी के इस बचकाना बयान को हालांकि गंभीरता से लेने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि एक डूबती राजनीतिक पार्टी का स्वयं घोषित अध्यक्ष इससे ज्यादा और कुछ बोल भी तो नहीं सकता।  चर्चा में बने रहने के लिए राहुल गांधी अपने राजनीतिक दल का इतिहास पढ़े बगैर कुछ भी बोलते रहते हैं। राहुल गाँधी को पहले अपने राजनीतिक दल का इतिहास ठीक ढंग से पढ़ना चाहिए फिर सत्ताधारी दल के मुखिया पर टिप्पणी करनी चाहिए।
राहुल गाँधी को पता होना चाहिए कि कांग्रेस ने सीताराम केसरी को किस तरह से धक्के देकर कांग्रेस के मुख्यालय से निकाला था , किस तरह से बाबरी विध्वंश के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष कमलापति त्रिपाठी को बेइज़्ज़त किया था। पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार के बाद उनके शव को ठीक तरह से चिता भी नहीं दी गई और उसी वजह से दूसरे दिन नरसिम्हा राव के शव को दुबारा अग्नि देकर अंतिम संस्कार सम्पन्न किया गया। बाबू जगजीवन राम को कांग्रेस ने हमेशा दूसरे दर्ज़े का सम्मान दिया।
जगजीवन राम को कांग्रेस ने कभी भी राजनीती में उभरने नहीं दिया। इसके अलावा नारायणदत्त तिवारी को भी इस हद तक परेशान किया गया कि उन्होंने तिवारी कांग्रेस का गठन कर लिया था। बात रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अटल जी से ना मिलने जाने की तो सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री के किसी अस्पताल में जाने से पहले तमाम तरह की सुरक्षा के इंतज़ाम करने  पड़ते हैं , सुरक्षा के तमाम पहलुओं  की जांच के बाद ही सुरक्षा एजेंसियां प्रधानमंत्री को कहीं भी जाने की इज़ाज़त देतीं हैं। ऐसे में राहुल गाँधी का बचकाना बयान कोई मायने नहीं रखता है। क्योंकि जिस कांग्रेस का राहुल गाँधी नेतृत्व करते हैं वह कांग्रेस अपने गुरु सामान अध्यक्षों का पहले से अपमान करती आयी है।
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