प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार भाजपा के रग रग में लोकतंत्र है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि लोकतंत्र उनकी पार्टी के रग-रग में है जो उसे सभी सहयोगी दलों को सफलतापूर्वक साथ लेकर चलने में सक्षम बनाता है। भाजपा और इसकी पूर्ववर्ती जनसंघ ने राष्ट्रहित में स्वतंत्रता के समय से सभी आंदोलनों का नेतृत्व किया है।

भाजपा के नये केंद्रीय मुख्यालय का उद्घाटन करते हुए मोदी ने 1951 में भारतीय जनसंघ के गठन के समय से पार्टी की विकास यात्रा को गिनाया। उन्होंने कहा कि यह कभी अपने मूलभूत आदर्शों से नहीं लड़खड़ाई और देशभक्ति से परिपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान कांग्रेस से कई नेता जुड़े थे, लेकिन बाद में अपने राजनैतिक मूल्यों का प्रसार करने के लिये उन्होंने अलग रास्ता अपनाया और नयी पार्टियों की स्थापना की।

मोदी ने कहा कि जनसंघ की स्थापना इसलिये की गई क्योंकि स्वतंत्रता के बाद यह महसूस किया गया कि एक या दो मजबूत राष्ट्रीय दल होने चाहिये।

उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘स्वतंत्रता के बाद भारतीय जनसंघ और उसके बाद भाजपा ने देश के हित में सभी आंदोलनों का नेतृत्व किया। हमें इसपर गर्व है।’’ इस दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और पार्टी पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
मोदी ने कहा कि इसलिये भाजपा ‘देशभक्ति के रंग में रंगी है’’ और देश के लिये हमेशा संघर्ष और बलिदान देने को तैयार है।उन्होंने कहा कि पार्टी का मूलभूत गुण लोकतंत्र से ओत-प्रोत है। उन्होंने कहा कि यह अपनी सोच, कार्य और अपने एजेंडा को लागू करने में लोकतांत्रिक भावना से निर्देशित है।
ऐसे समय में जब तेदेपा समेत कुछ सहयोगी दलों ने भाजपा के साथ अपने मतभेदों को सार्वजनिक किया है, प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी नीत राजग सरकार द्वारा किये गए काम को याद किया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं का मार्गदर्शन करने और देश में नयी उम्मीद जगाते हुए वाजपेयी सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने में सफल रहे।
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी मूल वजह यह है कि लोकतंत्र हमारे रग रग में है। इसलिये हम जहां तक संभव हो सकता है सबको साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि नया भवन भले ही पार्टी के लिये कार्यस्थल हो, लेकिन उसके काम का दायरा देश की सरहदों तक होना चाहिये। पार्टी कार्यकर्ता इसकी आत्मा होने चाहिये।
इस अवसर पर मोदी ने अलग-अलग राजनैतिक दलों की अलग-अलग राय भारतीय लोकतंत्र के गुलदस्ते को खूबसूरत बनाते हैं, लेकिन जिस तरीके से हमारा गठन किया गया है और हम काम करते हैं उस संबंध में अभी काफी कुछ करने की आवश्यकता है।

(साभार – भाषा )

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