फारुख अब्दुल्ला और ईद की नमाज़ 

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
भारत रत्न अटल जी की शोक सभा में जम्मू – कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने भारत माता की जय जय कार के नारे क्या लगा दिए। कुछ फिरकापरस्त नाराज़ हो गए। यह नाराज़गी इस हद तक पहुँच गई कि आज नमाज़ अता करने आये फारूख अब्दुला को ना सिर्फ विरोध का सामना करना पड़ा बल्कि उन्हें नमाज़ स्थल पर जूते भी दिखाए गए। कुछ लोगों ने तो नमाज़ अता कर रहे लोगों के साथ धक्का – मुक्की भी की। यह कौन सा इस्लाम है जो खुदा की इबादत करने वालों की राह में रोड़ा बनकर खड़ा हो जाता है ?
नमाज़ गाह में जूते लहराए जातें हैं ! हद हो गई , जिस खुदा को खुश करने के लिए खून खराबा तक करने से कुछ अति धार्मिक लोग बाज़ नहीं आते , उसी खुदा के घर में नमाज़ियों के साथ धक्का मुक्की की जाती है। ईद के मुबारक मौके पर पुलिस वालों की जान ली जाती है। वह भी उस पुलिस वाले कि जो खुद मुस्लिम है।
सेना पर ईद के अवसर पर पथराव किया जाता है।  यह कहाँ की इस्लामियत है ? बात करें फारूख अब्दुल्ला की तो फारूख अब्दुल्ला ने जो हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए हैं , वह उनकी मज़बूरी है। फारूख अब्दुल्ला के वालिद शेख अब्दुल्ला , खुद फारूख अब्दुल्ला और अब फारूख अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर की अवाम को भड़काने के सिवा किया क्या है ?
अस्सी साल की उम्र में पहुँच कर फारूख अब्दुल्ला को हिन्दुस्तान उनका अपना मुल्क दिखने लगा है , इनको तब हिन्दुस्तान अपना मुल्क नज़र नहीं आता जब सरेआम तिरंगा पैरों के तले रौंदा जाता है और तिरंगा रौंदने वाले को छोड़ कर जम्मू की पुलिस तिरंगा लेकर चलने वाले पर ही आपराधिक मामला दर्ज़ करती है।  उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुँच कर यदि अब्दुल्ला परिवार प्रायश्चित करना चाहता है तो अच्छी बात है। मगर हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाकर यदि यह परिवार अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहेगा तो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email