फिल्म पद्मावती के पहले भी कई फिल्मों का विरोध झेल चुका है हिंदी फिल्म उद्योग। 

कर्ण हिंदुस्तानी )
फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती इन दिनों विवाद का कारण बनी हुई है , हर जगह फिल्म का विरोध बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।  ख़ास कर राजस्थान की वीर भूमि से जुड़े समुदाय ने फिल्म को किसी भी हाल में प्रदर्शित ना होने देने की कसम खायी हुई है।  इसके साथ ही अब फिल्म के प्रदर्शन की तारीख भी आगे सरका दी गई है। जब से हिंदी फिल्मों का दौर शुरू हुआ है और मूक फिल्मों से ध्वनि वाली फिल्में प्रदर्शित होने लगी हैं तब से किसी ना किसी फिल्म को लेकर किसी ख़ास समुदाय का विरोध होता ही रहा है। कई बार तो सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद भी फिल्मों के गानों को सरकारी रेडियो और टेलीविज़न पर प्रदर्शित नहीं किया गया है। विवादों में रहने के बाद जब संजय दत्त की फिल्म खलनायक प्रदर्शित हुई तो कई जगह इस फिल्म का विरोध किया गया। फिल्म के एक गाने चोली के पीछे क्या है को तो आज भी सरकारी अधिकार वाले रेडियो पर बजाया नहीं जाता , दूरदर्शन पर भी यह फिल्म कभी प्रदर्शित नहीं हुयी। इसके पहले की बात करें तो १९५६ में गुरुदत्त की फिल्म प्यासा प्रदर्शित हुयी थी। इस फिल्म में साहिर लुधियानवी द्वारा लिखित नज़्म ‘ जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं ;, पर सरकार ने अघोषित प्रतिबंध लगवा दिया था।  यहां तक कि साहिर जी की लिखित तल्खियां को भी सरकारी नाराज़गी का शिकार होना पड़ा था। फिल्म साधना में साहिर जी का ही लिखा गीत औरत ने जन्म दिया मर्दों को , मर्दों ने उसे बाज़ार दिया , जब जी चाहा मचला कुचला , जब जी चाहा दुत्कार दिया , काफी विवादित रहा था। कहा जाता है कि इस गाने के विरोध में उस समय देह   व्यापार करने वाली महिलाओं ने विरोध किया था। अब और फिल्मों की बात करें तो जब अनिल शर्मा की फिल्म ग़दर एक प्रेम कथा प्रदर्शित होने वाली थी उस समय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फिल्म के कुछ संवादों को लेकर हंगामा किया था। मगर बाद में सब शांत हो गया और फिल्म काफी हिट रही। इसी तरह भीष्म साहनी के उपन्यास तमस को लेकर भी हंगामा हुआ था। इस उपन्यास को दूरदर्शन पर धारावाहिक के रूप  में प्रदर्शित किया गया था , तब भी एक विशेष समुदाय के लोगों खूब हंगामा किया था। ऐसी कई फिल्में हैं जिन पर हंगामा होता रहा है। फिल्म के  विषय को लेकर और उस विषय को फिल्माने को लेकर कई बार देश भर में हंगामा हुआ मगर बाद में सब शांत हो गया। इससे पहले बाजीराव मस्तानी को लेकर भी हंगामा हो चुका है। अब पद्मावती को लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है , यह बवाल कब और कैसे शांत होगा कोई नहीं जानता। मगर एक बात तो सत्य है कि हिंदी फिल्म उद्योग को इस तरह के हंगामों की आदत सी पद गयी है।
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email