भाजपा में स्थानीय कार्यकर्ता आपातकाल जैसी स्थिति झेल रहे है,स्थानीय मोदीओ के आतंक से.

(कर्ण हिंदुस्तानी )
जबसे देश में मोदी युग की शुरुवात हुई है , तब से हर शीर्ष पर पहुचे भाजपा नेता को खुद में मोदी नज़र आने लगा है।और बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता इस स्थानीय मोदी  को ढोते – ढोते थकने लगे हैं। मौजूदा समय में बीजेपी में शीर्ष पर पहुचे बाहर से आयातित नेता गण हों या फिर पहले से विराजित नेतागण हों , सभी के शरीर में मोदी जी की आत्मा का संचार हो चुका है। सबके सब खुद को मोदी से रत्ती भर भी कम आंकने को तैयार हैं। खासकर जो सांसद और मंत्रीगण हैं , उनमें तो मोदी लहर का ऐसा रंग चढ़ा है कि यदि कोई कार्यकर्ता सम्मेलन भी आयोजित किया जाना होता है या जिला अथवा अन्य सेल केंद्र अथवा प्रदेश स्तर के किसी नेतागण को बुलाना चाहते हैं तो ये  स्थानीय मोदी  इसकी इज़ाज़त नहीं देता। यह स्थानीय मोदी मतलब सांसद और मंत्रीगण। इन लोगों के क्षेत्र में केंद्र अथवा राज्य से कोई भी वरिष्ठ अथवा निपुण व्यक्ति को आमंत्रित ना करने की सलाह ये स्थानीय मोदी  देतें हैं। इन लोगों की कार्यकर्ताओं पर  पकड़ नहीं दहशत बन चुकी है। कार्यकर्ताओं के विभिन्न कार्यों को टालना , कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ख्याल ना रखना और अपने आस पास हमेशा पंटरों को एकत्र करके रखना इन स्थानीय मोदी का शौंक बन गया है।  यदि कोई सामान्य नागरिक इनसे मिलने भी जाता है तो इन के पंटर ही पहले नागरिक की क्लास लेते हैं , क्यों मिलना है ? पहले समय लिया था क्या ? कहाँ रहते हो ? शेठ आज व्यस्त हैं , कल आना , आपका काम नहीं होगा , जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जब तक देश और राज्य में बीजेपी की सरकार नहीं थी , तब तक यही लोग जनता से ऐसे मिलते थे जैसे भरत मिलाप हो रहा हो , आज तो मोदी लहर का घमंड सभी पर चढ़ गया है। राम के नाम की माला जपने वाले ये स्थानीय मोदी दिल में रावण जैसा घमंड रखते हैं। इससे जनता अब थोड़ी उकताने लगी है। जनता नोट बंदी के समय मोदी जी के साथ रही , सब्सिडी भी जनता ने खुद होकर त्याग दी , जी एस टी का भी आम जनता ने दिल से स्वागत किया।  जनता आज भी मोदी जी को और उनकी नीतियों को पसंद करती है , मगर मोदी के नाम पर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले इन स्थानीय मोदी से जनता नाराज़ है। इन नेताओं ने अपने स्तर पर खुद को मोदी घोषित कर रखा है। इनकी नज़र में नरेंद्र मोदी दिल्ली के मोदी हैं और हम स्थानीय मोदी हैं। यह लोग मोदी जी की नीतियों का प्रसार प्रचार करने के बजाए , खुद को ही आगे कर रहे हैं , जिससे जनता परेशान है। यदि ऐसा ही रहा तो २०१९ में इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना ही पडेगा।
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