भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग – १३ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
चंद्रशेखर आज़ाद की बात से भगत सिंह कतई तैयार नहीं थे। वह गिरफ्तारी देना चाहते थे। जिससे मुकदमे के दौरान वह अपनी बात सभी तक पहुंचा सकें। उधर जयदेव कपूर ने अपनी तरफ से इस तरह की तैयारी कर ली थी कि असेम्ब्ली में आसानी से प्रवेश मिल जाए। भगत सिंह , चंद्रशेखर आज़ाद और उनके अन्य साथी असेम्ब्ली में जाकर देख कर आ चुके थे। सभी ने बम कहाँ फेंका जाएगा और अन्य विषयों की पूरी तहकीकात कर ली थी। इस टीम को किसी ने खबर दी कि होली के दिन सचिवालय के सचिव और असेम्ब्ली के सदस्यों की दावत में वायसराय भी आएँगे। यह खबर मिलते ही संगठन के सभी सदस्य नए जोश के साथ सक्रीय हो उठे। उन्होंने वायसराय की कार को असेम्ब्ली में जाते समय ही बम से उड़ाने की योजना को अंजाम देने पर विचार किया। किन्तु वायसराय की कार को उड़ाने की योजना विफल हो गई क्योंकि वायसराय उस मार्ग से गुजरे ही नहीं जहां भगत सिंह और उनके साथी इंतज़ार कर रहे थे। अब सभी का ध्यान असेम्ब्ली में बम गिराने की योजना पर फिर से लग गया। केंद्रीय असेम्ब्ली में दो बिल पेश किये जाने की खबर इन क्रांतिकारियों को मिली। एक बिल था जन सुरक्षा विधेयक और दुसरा था औद्योगिक विवाद विधेयक।  पहले बिल का मकसद था देश भर में उठ रहे युवकों के आंदोलन का दमन करना और दूसरे का उद्देश्य था कामगारों को हड़ताल से वंचित किया जाना। इन दोनों बिल के बारे में आशंका जताई जा रही थी कि कांग्रेस के सदस्य इन बिलों का विरोध करेंगे लेकिन  वायसराय अपने वीटो पावर का प्रयोग करके इन बिलों को पारित करवा लेंगे। क्रांतिकारियों के सदस्यों ने एकमत से फैसला लिया कि जैसे ही वायसराय वीटो पावर का इस्तेमाल करतेhue इन दोनों बिलों को पास करने की घोषणा करेंगे , ठीक उसी समय असेम्ब्ली में बम फेंके जाएंगे। बम फेंके जाने की योजना को अंतिम रूप देने के पश्चात भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली में एक साथ अपनी तसवीरें खिंचवाई। जबकि इन सबसे अलग चंद्रशेखर आज़ाद अभी भी भगत सिंह को असेम्ब्ली में बम फेंके के लिए भेजने को तैयार नहीं थे।  उनका मानना था कि जो योजना कार्यान्वित होने जा रही है ,उस योजना  के अनुसार भगत सिंह ब्रिटिश सरकार के हाथ लग जाएंगे।  इसके बाद भगत सिंह का जीवन बचाना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह रही कि जब चंद्रशेखर आज़ाद दिल्ली से निकले तो उनका मन भर आया था।  उन्होंने अपने सभी साथियों को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त का विशेष ध्यान रखने को कहा। असेम्ब्ली में  से दोनों विधेयक रखे गए। सदस्यों ने दोनों विधेयकों का जम कर विरोध किया और विधेयक पारित नहीं होने दिए। इससे वायसराय मन ही मन काफी क्रोधित हो गया।  उसने वहीँ घोषणा कर दी कि दोनों विधेयक हर हाल में पारित होंगे। आठ अप्रेल १९२९ का दिन इन दोनों विधेयकों को वीटो पावर के सहारे पारित करने का दिन मुक़र्रर किया गया।
(जारी ……)
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