भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग – १५ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
बम धमाके और परचियाँ फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिले। भगत सिंह इस वक़्त गहरे तनाव में आ गए थे। तभी वहाँ इंस्पेक्टर जॉनसन आ गए।  भगत सिंह ने उन्हें देख कर कहा , आप चिंता ना करें , हम सभी को बता देंगे कि यह पुण्य कार्य हमने किया है। मगर इंस्पेक्टर जॉनसन काफी भयभीत था क्योंकि भगत सिंह के हाथ में पिस्टल अभी भी मौजूद थी। भगत सिंह ने जॉनसन को पिस्टल से डरा हुआ देख कर अपनी पिस्टल सामने की मेज पर रख दी। तब जाकर जॉनसन ने भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को पकड़ने की हिम्मत दिखाई। जो पर्चे असेम्ब्ली में फेंके गए थे उन्हें भी बटोर लिया गया। ब्रिटिश सरकार ने पूरी कोशिश की थी कि पर्चे का मैटर किसी अखबार तक ना पहुंचे , मगर दिल्ली के अंग्रेजी समाचार पत्र हिन्दुस्तान टाइम्स के संवाददाता ने किसी तरह से वह पर्चा उठा लिया। यह पर्चा हिन्दुस्तान टाइम्स के शाम के संस्करण में प्रकाशित भी कर दिया गया। पुलिस के अधिकारी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को लेकर कोतवाली पहुंचे और उन पर पुलिस स्टेशन में बयान देने को कहा गया।  दोनों ने किसी भी तरन का बयान देने से इंकार करते हुए कहा , हमें जो भी कहना है , हम अदालत में कहेंगे।
०७ मई १९२९ को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को एडिशनल मजिस्ट्रेट मिस्टर पूल की अदालत में पेश किया गया। यह अदालत जेल में लगाई गई थी। दोनों पर सरकारी वकीलों ने बड़े संगीन आरोप लगाए थे। जिन्हें सुन कर अदालत में मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित थे। भगत सिंह सभी आरोपों को सुन कर शांत बैठे रहे।  जब अदालत ने भगत सिंह को अपना पक्ष रखने को कहा तो भगत सिंह ने कहा वह अपना पक्ष सेशन जज की अदालत में ही रखेंगे। भगत सिंह के इस बर्ताव से मजिस्ट्रेट पूल और सरकारी वकीलों के चेहरे की हवाइयां उड़ गई। मजिस्ट्रेट पूल ने कहा ठीक है , भारतीय दंड विधान की धारा ०३ के अंतर्गत तुम्हारा मामला सेशन जज मिडलटन की अदालत में भेजा जाता है। इसके बाद ०४ जून १९२९ को दिल्ली की सेशन अदालत में कार्रवाई शुरू हुई। पहले सभी सरकारी गवाहों के बयान लिए गए। इसके बाद ०६ जून १९२९ को बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह की तरफ से बयान दिया गया। दोनों ने अपने बयान में कहा , हमारे खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं , उन सभी आरोपों का हम स्पष्टीकरण करना चाहते हैं और कुछ सवाल उठाना चाहते हैं ,
१) क्या असेंबली में बम फेंके गए थे ? अगर ऐसा हुआ तो इसकी वजह क्या थी ?
२) निचली अदालत में जो हम पर आरोप लगाए गए हैं , वह सही हैं क्या ?
(जारी ………)
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