भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग – ३ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
अंग्रेज़ों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना करने के बाद भारत पर अपना एकाधिकार जमाना शुरू कर दिया था। विभिन्न राजघरानों में बंटे भारत को एक सूत्र में बाँधने के बजाए अंग्रेज़ों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई , जो कि सफल भी रही। इस फूट डालो राज करो की नीति के चलते मित्र राज्य भी आपस में लड़ने लगे। कई राज्यों के राजा अंग्रेज़ों का साथ देने लगे। जिसमें सिंधिया घराना भी था। अंग्रेजी हुकूमत के आगे जी हज़ूरी करने वाले राजाओं की संख्या में दिन – ब – दिन बढ़ोतरी होने लगी। अंग्रेजी हुकूमत में फ़ौज हो या पुलिस विभाग हर जगह महत्वपूर्ण तो नहीं फिर भी बड़े ओहदों पर भारतियों को नियुक्त किया जाने लगा। इसके पीछे वजह यह थी कि अपनी हुकूमत के खिलाफ बोलने वालों को अंग्रेज़, भारतीयों से ही दमन नीति पर अमल करने को कहते थे। घोड़े पर सवार पुलिस बल आज़ादी की जंग लड़ रहे भारतीयों को भारतीय सिपाहियों से ही पिटवाते थे। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण जालियां वाला बाग़ हत्याकांड था। इस हत्याकांड का नेतृत्व भले ही जनरल दायर ने किया था।  मगर निहत्थे भारतियों पर गोली चलाने का कार्य भारतीय सिपाहियों ने ही किया था।  जो कि अंग्रेज़ों की नौकरी करते थे। अंग्रेजी हुकूमत ने जान लिया था कि भारतीयजन  मानस कान के  कच्चे होते हैं। इसी कमज़ोर कड़ी को पकड़ कर अंग्रेज़ों ने भारतीय संस्कृति को तोड़ने का काम शुरू किया।  विभिन्न जाती – धर्म के अनुयाईयों को आपस में एक रणनीति के तहत लड़वाया गया। ऊंच – नीच का भेद भाव पैदा किया गया। अंग्रेजी हुकूमत की यह नीति कारगर साबित हुई और जो लोग अभी तक एक दूसरे के हर दुःख सुख में खड़े होते थे वह जाती – धर्म पर विचार करने लगे। आपसी भेदभाव चरम सीमा पर जा पहुंचा। अँगरेज़ यह बात अच्छी तरह जानते थे कि यदि किसी देश को धरातल में ले जाना है तो सबसे पहले उसकी संस्कृति पर प्रहार करो। यदि संस्कृति पर ज़ोरदार प्रहार किया गया तो देश बिखरने में देर नहीं लगेगी। इसी सूत्र को पकड़ कर अंग्रेज़ों ने सबसे पहले भारतीय सभ्यता को छिन्न भिन्न करना शुरू किया। वेद – पुराण – उपनिषद और अन्य धार्मिक ग्रंथों की परिभाषा को अपने ढंग से प्रभाषित करने का कार्य अंग्रेजी हुकूमत ने किया। सबकुछ जानते हुए भी भारतीय जनता अपनी संस्कृति को बिखरते हुए देखती रही।  इसकी मुख्य वजह यह भी थी कि भारतीय जनता एक सूत्र में बंधी नहीं थी।  राज्यों में बंटे होने के कारण भारत की जनता अपने राजा के प्रति बफादार थी।  बाकी किसी से उसे कुछ लेना देना नहीं था। भारतियों की उदार नीति को भी अँगरेज़ अच्छी तरह से समझने लगे थे। भावनाओं में बहकर भारतीय जनता कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहती थी। अपने धर्म के प्रति कट्टरता भी भारतियों में जागने लगी थी।  जो कि अंग्रेज़ों की फूट डालो राज करो की नीति का ही हिस्सा थी। इसी नीति ने कथित आज़ादी के वक़्त देश की सरज़मीं को दो टुकड़ों में बाँट दिया और वह भी धर्म के आधार पर। (जारी …..)
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