भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग – ३६ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
मोहम्मद  जिन्नाह को लगने लगा कि महात्मा गाँधी और  मोतीलाल नेहरू उनके विरोधी हैं। जबकि गाँधी सहित नेहरू यह बांटे ही नहीं थे कि मुसलमानों की समस्या का कोई भी वज़ूद भारत में है। १९२८ के अंत में कांग्रेस का एक अधिवेशन लाहौर में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि भविष्य में कांग्रेस का अधिवेशन कभी भी क्रिसमिस की छुट्टियों में आयोजित नहीं किया जाएगा , इस बात की व्याख्या करते हुए नेहरू ने कहा कि चूँकि कांग्रेस गरीब भारतियों का नेतृत्व करती है , ऐसे में जनता को अधिवेशन में आने के लिए नए वस्त्र खरीदने पड़ते हैं जिसे जनता वहन नहीं कर सकती। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में घोषित किया गया कि २६ जनवरी  का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह प्रस्ताव पारित हो गया। प्रस्ताव की रूपरेखा सारे देश में डाक से भेज दी गई। दुसरी ओर जिन्नाह अपने मुंबई स्थित मालाबार हिल वाले घर पर अकेले राष्ट्रवाद की नव क्रांति की तरंग को सरकारी उपेक्षा तथा दमन के साथ टक्कर देते हुए देख रहे थे। जिन्नाह ने कांग्रेस के इस कार्यक्रम को राजनीतिक उन्माद कहा। फरवरी की शुरुवात में जिन्नाह ने हिंदूमहासभा के नेता मदन मोहन मालवीय से मुलाकात कर साम्प्रदायिक समस्या पर चर्चा की। इस चर्चा से जिन्नाह को लगा कि समस्या का समाधान निकल सकता है। किन्तु जिन्नाह का यह विचार गलत साबित हुआ और सर्वदलीय सम्मेलन में कांग्रेस ने शिरकत ही नहीं की। जिन्नाह ने अपना पूरा ध्यान लंदन में आयोजित होने वाली गोलमेज परिषद पर लगा दिया। उन्होंने वायसराय से कहा कि गोलमेज परिषद में उन्हें आमंत्रित किया जाए और एक आधिकारिक निमंत्रण पत्र भी भेजा जाए। इसके बाद हाऊस ऑफ़ लॉर्ड्स की रॉयल गैलरी में सम्राट जॉर्ज पंचम  ने पहली बार भारत संबंधी गोलमेज परिषद का उद्घाटन  किया। इसमें भारत के लगभग ५८ प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। जिनमें जिन्नाह सहित आगा खान , सप्रू और जयकार भी थे , इनके अलावा देशी रियासतों के सोलह प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस गोलमेज परिषद में जिन्नाह ने कहा , मौजूदा समय में गोलमेज पर चार पक्ष मौजूद हैं , एक ब्रिटिश ,द्वितीय देशी रियासत , तृतीय हिन्दुओं का पक्ष और चौथा मुसलामानों का पक्ष है। जिन्नाह ने ललकारते हुए कहा कि अगर यह परिषद भारतीय आकांक्षाओं के लिए किसी समझौते तक नहीं पहुँचती तो सम्मेलन से बाहर रखे गए सभी लोगों के साथ सात करोड़ मुसलमान असहयोग आंदोलन के साथ खड़े हो जाएंगे।
(जारी …..)
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