भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग -३७ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
जिन्नाह के तेवरों से सभी को पता चलने लगा था कि यह चिंगारी अब आग का भयावह रूप लेने के लिए तैयार है। मगर कोई भी जिन्नाह को समझाने के मूड़ में नहीं था। यहां तक कि जिन्नाह भी कुछ समझने को तैयार नहीं थे। उधर जिन्नाह को संघिये ढाँचे से संबंधित उप समिति का सदस्य बनाया गया , इस समिति के अध्यक्ष लार्ड सैफी थे।  जिन्नाह तथा सैफी ने इससे पहले ही अपनी बात स्पष्ट कर दी थी कि तब तलक किसी भी तरह का कोई संविधान सफलता को नहीं छू सकता जब तलक उसमें मुसलमानों सहित दूसरे अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने का जिक्र ना हो। हिन्दुओं और मुसलामानों के बीच दरार बढ़ती जा रही थी।  हेली ने इरविन को सम्मेलन की जानकारी प्रेषित करते हुए लिखा कि हिन्दुओं और मुसलमानों को विभिन्न वाहनों के जरिए सम्मेलन में लाया गया था। बीती रात इनमें से कुछ के साथ मेरी बात भी हुई। मगर भविष्य के जो संकेत मिल रहे हैं वह यह है कि शायद मुसलमान अलग निर्णायक मंडलों की दावेदारी त्याग देंगे , परन्तु पंजाब तथा बंगाल में उनके बहुमत के साथ दूसरे प्रांतों में उन्हें अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व मिल जाएगा। हेली की जानकारी सच साबित हुई और उन्हें फिर लिखना पड़ा भारत से आने वाले दवाब की वजह से अब मुसलमानों ने अलग निर्वाचन मंडलों की खुद की दावेदारी त्यागने से इंकार करना शुरू कर दिया। साथ ही अपनी सभी १४ सूत्रीय मांगों के संदर्भ में ज़ोरदार आवाज़ भी उठाने लगे। वहीँ दुसरी ओर मुंजे की अगुवाई में हिन्दू भी इन १४ सूत्रीय मांगों पर अपनी सहमति देने से पीछे हटने लगे थे। इस कारण सम्मेलन में से कुछ हासिल नहीं हो सका। चेकर्स में सम्पन्न हुई बैठक में असफलता हासिल होने के बाद रामसे मेक्डोनाल्ड ने  लार्ड विलिंग्डन से मदद लेने की सोची। लार्ड विलिंग्डन उस वक़्त कनाडा के गवर्नर जनरल थे। मेक्डोनाल्ड का मानना था कि इस समस्या का हल भारत में भविष्य में सरकार चलाने के हिसाब से ज़रूरी है। जिन्नाह अब अपनी बात स्पष्ट रूप से कहने या यूँ कहें कि अपनी बात खुल का रखने को आतुर हो रहे थे। दूसरे गोलमेज सम्मेलन की संघीय ढाँचे से संबंधित कमिटी का सदस्य बनने के लिए भारत मंत्री वेजवुड बेन ने जिन्नाह को निमंत्रण प्रेषित किया। किन्तु इस बार गोलमेज परिषद में जिन्नाह की भूमिका काफी कम हो चुकी थी क्योंकि महात्मा गाँधी ने भी इस गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने की घोषणा कर दी थी। गांधी के गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गाँधी ने जो शर्तें रखी थीं उनको पढ़कर वायसराय इरविन ने गाँधी के बारे में रामसे मेक्डोनाल्ड को लिखा कि यह अजीबो गरीब शैतान नुमा इंसान है , जो हर समय किसी ना किसी फायदे के चक्कर में ही लगा रहता है। इसकी हर बात में मुझे महात्मा के ऊपर बनिया हावी होते दिखता है।
(जारी …….)
Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Facebook
Twitter
YouTube
Follow by Email