भारत की आज़ादी का कड़वा सच (भाग – ४ )

(कर्ण हिंदुस्तानी )
अंग्रेज़ों ने आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे युवकों और खुद को आज़ादी की लड़ाई का मसीहा बताने का ढोंग करने वालों को पहचान लिया था। यही वजह थी कि अंग्रेज़ों ने कभी भी गरम दल के नेताओं से कोई भी बात नहीं की। अंग्रेज़ों ने अहिंसात्मक जंग लड़ने वाले गाँधी और नेहरू को लोगों की नज़रों में नायक बताना शुरू कर दिया। विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार हो या असहयोग आंदोलन हो हर बार अंग्रेज़ भारतियों के सीने पर मूंग डलने में कामयाब हो रहे थे। गाँधी चरखा चला कर , सूत कातकर आज़ादी की जंग का ढोल पीट रहे थे तो गरम दल के नेता जनरल डायर को मौत के घाट उतार कर जैसे को तैसा जवाब दे रहे थे। युवा स्वतंत्रता सैनानी जानते थे कि अंग्रेजी हुकूमत के मन में जब तक मौत का भय नहीं आएगा, तब तक यह गोरी सरकार भारत को आज़ाद नहीं करेगी। १९३० के बाद  अंगेज़ी हुकूमत यह बात अच्छी तरह से समझने लगी थी कि अब गरम दल देश के युवाओं को आज़ादी और गुलामी में फर्क समझाने में कामयाब होने लगा है। अगर यही स्थिति रही तो कई गोर अफसरों की लाशें ही ब्रिटैन राज घराने तक पहुंचेंगी। अंग्रेज़ों ने गाँधी को आगे करते हुए युवा स्वतंत्रता सैनानियों की आवाज़ को दबाने की चाल चली। गाँधी हर बात पर अन्न त्याग कर अनशन पर बैठने लगे। लोगों की भावनाएं आहत होने लगीं कि गाँधी उम्र के इस पड़ाव में भूखा प्यासा देश के लिए कार्य कर रहा है। लोगों को गरम दल के प्रति  कुछ हद तक नफरत होने लगी। मगर एक तबका ऐसा भी था जो गरम दल की हर कार्रवाई का समर्थन कर रहा था।  इस समर्थन वाले गुट को तोड़ पाना काफी मुश्किल था। अंग्रेज़ों ने कई जगह छापेमारी करनी शुरू कर दी।  अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ चोरी छिपे वितरित होने वाला साहित्य जब्त किया जाने लगा।  गरम दल अपनी योजनाओं को अंजाम देने के लिए स्फोटक सामग्री भी तैयार करने लगा।  जिससे अंग्रेजी हुकूमत काफी डरी हुई थी।  दरम्यान नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फ़ौज का भी गठन कर लिया था। इस आज़ाद हिन्द फ़ौज के सहारे नेता जी विश्व भर में अपनी बात रख रहे थे और अंग्रेजी हुकूमत की बर्बरता को सबकी निगाहों में लाने का प्रयास भी कर रहे थे। आज़ाद हिन्द फ़ौज अंग्रेजी हुकूमत को जड़ से उखाड़ने का सराहनीय कार्य कर रही थी।  यहां तक कि नेता जी अडोल्फ हिटलर को भी पूरे रुबाब के साथ “मिलकर आ चुके थे।  जिसकी वजह से सुभाषचंद्र बोस अंग्रेज़ों के लिए प्रथम क्रमांक के शत्रु बन चुके थे। (जारी….)
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