मंत्रिमंडल फेरबदल, सन्देश सबके लिए।।

नई दिल्ली। (राजेश सिन्हा) आज सुबह केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में एक बात साफ हो गई,कि नरेंद्र मोदी औऱ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सब पर नजर है।चाहे वो पार्टी का वरिष्ठ रहकर मंत्री बन गया हो और दिए गए टास्क नही पूरा कर रहा हो या मंत्री बन कर लापरवाही कर रहा हो।

या फिर दूर दराज बैठकर देश के किसी कोने में मोदी के दिये फरमान को जी जान से पूरा करने में लगा हो। मोदी ने इन बातों को भी महत्व नही दिया जिसमें नये मंत्रिमंडल में शामिल कुछ सांसद पार्टी विरोधी बयानबाजी करते रहे है या मोदी विरोधी माने जाते रहे है।कुछ तो सांसद भी नही थे।

आज के मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ और सिर्फ योग्यता,कार्यक्षमता,औऱ टास्क के प्रति कटिवधता औऱ पार्टी के लिये समर्पण ही मापदण्ड रहा।

सुबह साढ़े 10:30 बजे पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। जिसमे पूर्व नौकरशाह आरके सिंह, सत्यपाल सिंह, हरदीप सिंह पुरी और अल्फोंसो कांनान्थनं समेत 9 नए चेहरों को शामिल थे। कैबिनेट विस्तार से पूर्व पीएम ने सभी कैबिनेट में शामिल होने वाले नए लोगों को सुबह 9 बजे नाश्ते पर बुलाया था। बताया जा रहा है कि पीएम ने भविष्य के अपने विजन से इन नए मंत्रियों को अवगत कराया ।।

 

इनको किया शामिल

1. शिव प्रताप शुक्ला
वित्त राज्यमंत्री
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद, एमरजेंसी के समय 19 महीने जेल में रहे,उत्तर प्रदेश से 4 बार विधायक रहे। ग्रामीण विकास योजना किर्यान्वयन में विशेष सक्रियता।।

2. अश्विनी कुमार चौबे
स्वास्थ एवम परिवार कल्याण राज्य मंत्री
बक्सर से सांसद, मोदी विरोधी गुट के, दलित वस्तियों में 11 हजार शौचालय वनाने में मदद, छात्र राजनीति से जेपी आंदोलन में सक्रियता।

3. वीरेंद्र कुमार
महिला व बाल विकास राज्य मंत्री
दलित चेहरा, मध्यप्रदेश से 6 बार सांसद, दलितों के उत्थान के लिये निरन्तर प्रयास, आपातकाल में 19 महीने की जेल काटी।

4. अनंत कुमार हेगड़े
कौशल विकास राज्यमंत्री
कर्नाटक से 5 बार सांसद, बाहुवली की इमेज, पार्टी के लिये कुछ भी करने तत्पर, ग्रामीण विकास योजनाओ में सक्रियता,

 

5. राजकुमार सिंह
ऊर्जा मंत्रालय, स्वतंत्र प्रभार

बिहार के आरा से सांसद, रथयात्रा के दौरान बिहार मे आडवाणी की गिरफ्तारी, मनमोहन सरकार में गृह सचिव,1975 बैच के बिहार कैडर के आईएएस, पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी के लिये जाने जाते है।पुलिस और जेल आधुनिकीकरण में विशेष भूमिका, और आपदा प्रबंधन क्रियान्वयन का अनुभव,

6. हरदीप सिंह पुरी
शहरी विकास राज्य मंत्री
सांसद नही,भारतीय विदेश सेवा से रिटायर, 4 दशक तक देश के प्रमुख पदों पर रहने का अनुभव,विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में दक्षता

7. गजेंद्र सिंह शेखावत
कृषि राज्यमंत्री
राजस्थान से सांसद, सादा जीवन, सोशल मीडिया पर सक्रियता,युवाओ के चहेते, तकनीक से कृषी को प्रोत्साहन

8. सत्यपाल सिंह
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री
उत्तरप्रदेश से सांसद, मुम्बई के पुलिस कमिश्नर रहे है।संगठित अपराध खत्म करने में महारत,

9. अल्फ़ोंस कन्नाथनम
पर्यटन राज्य मंत्री
सांसद नही, केरल कैडर के आईएएस, दिल्ली के अवैध निर्माण पर कड़ी करवाई की छवि, ईमानदार नोकरशाह।

इसके साथ निर्मला सीतारामन को रक्षा मंत्रालय, पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय, धर्मेंद्र प्रधान को कौशल विकास एवं पेट्रोलियम, नितिन गडकरी को नमामि गंगे का प्रभार जैसे महत्वपूर्ण फेरबदल माना का रहा है।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की कवायद गुरुवार से ही शुरू हो गई थी। तब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बाद सबसे पहले रूडी के इस्तीफे की खबर आई थी। इसके बाद एक-एक कर सात मंत्रियों के इस्तीफे की खबर आई लेकिन इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की। शनिवार को कलराज मिश्र ने खुद इस्तीफे की बात स्वीकारते हुए बताया कि उम्र 75 वर्ष से ज्यादा होने के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है।

दो पूर्व आईएएस, एक पूर्व आईपीएस, एक पूर्व आईएफएस
शनिवार को घोषित सभी नाम पहली बार केंद्र की सरकार में मंत्री बन रहे हैं। इनमें आरके सिंह और अल्फांस पूर्व आईएएस, सत्यपाल सिंह पूर्व आईपीएस और हरदीप सिंह पुरी पूर्व आईएफएस रहे हैं। अल्फांस को दिल्ली में डिमॉलिशन मैन के रूप में याद किया जाता है। वहीं, आरके सिंह बिहार में लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करने के बाद चर्चा में आए थे। सत्यपाल सिंह मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे हैं। और बागपत से राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह को हराया था।

तीन दिन से चल रही मशक्कत
इससे पूर्व तीसरे फेरबदल से सरकार को ज्यादा युवा और ऊर्जावान बनाने के लिए मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को नाम तय करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इससे असहज हुए पार्टी के कुछ दिग्गजों ने बकायदा संघ के दरबार में उपेक्षा को लेकर गुहार भी लगाई है। उधर, सहयोगी दल जद (यू) की ओर से कहा गया कि उन्हें इस फेर-बदल के बारे में कोई सूचना ही नहीं है।

जिन नौ चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है उनमें सहयोगी दलों का कोई भी नहीं है। ऐसे में मुमकिन है कि सहयोगी दलों के लिए कुछ मंत्री पद खाली रखे जाएं और उन्हें उन दलों के साथ मशविरे कर बाद भरा जाए।

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