महात्मा गाँधी और राहुल गाँधी

 (कर्ण हिंदुस्तानी )
आखिरकार राहुल गाँधी की ताजपोशी हो ही गयी।  खुद को महात्मा गाँधी का वंशज बताने वाले राहुल गाँधी अब खुद को पंडित साबित करने पर उतर आएं हैं , जबकि सभी जानते हैं कि महात्मा गाँधी बनिया बिरादरी के थे। सिर्फ जनेऊ पहनने से कोई पंडित नहीं हो जाता। आज चर्च छोड़ कर और दरगाहों पर चादर चढ़ाना छोड़ कर मंदिरों में भजन गाने को आतुर राहुल गाँधी को काफी देर बाद समझ आया कि इस देश में हिन्दुओं का भी एक स्वाभिमान है।  बहुसंख्यक लेकिन बंटे हुए हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ करके नहीं चलने वाला। रही बात महात्मा गाँधी की तो महात्मा गाँधी ने कभी भी हिन्दुओं का साथ नहीं दिया , बंटवारे के समय जब खून खराबा हो रहा था उस्वक़्त मदिरों में तो मुस्लिमों को शरण दी गई मगर मस्जिदों में हिन्दुओं को शरण देने का गाँधी ने पुरज़ोर विरोध किया था।  पकिस्तान से हिन्दू परिवारों की लाशें आ रही थी मगर गाँधी को कोई मलाल नहीं था। वह तो बस मुस्लिमों को बचाने में लगा था। आज तक कांग्रेस वही नीति अपना कर आज़ाद हिन्दुस्तान में मुस्लिमों के हित के फैसले लेती आयी थी।  फिर चाहे वह सरकारी नौकरी में भागीदारी हो या फिर है यात्रा के दी जाने वाली सहूलत हो। हर जगह मुस्लिमों को तवज़्ज़ो दी गयी। गाँधी को अपनाकर सही मायने में फ़िरोज़ खान को दरकिनार करने की कुटिल चाल नेहरू परिवार ने चली। नाम हिन्दुओं जैसा रख कर काम मुस्लिमों जैसा करने की चाल कांग्रेस ने की है। आज राहुल गाँधी खुद को पंडित साबित करने पर तुले हैं। पंडित बनने के लिए काम से कम हिन्दू होना तो ज़रूरी है और अफ़सोस है कि राहुल गाँधी हिन्दू नहीं हैं। अपने दादा फ़िरोज़ गाँधी की कब्र पर झाँकने का तक का कार्य ना करने वाले राहुल गाँधी किस मुँह से खुद को पंडित कहते हैं ? इलाहाबाद में फ़िरोज़ गाँधी की कब्र पर सूअर बैठे रहते हैं , इसकी वजह यह है कि फ़िरोज़ के वंशज खुद को हिन्दू कहलवाने की होड़ में लग गए हैं। गाँधी उपनाम लगाने से कोई  मुस्लिम की औलाद हिन्दू नहीं हो जाता , यह बात राहुल को समझनी ही होगी।  कांग्रेस अध्यक्ष बनने से हर कोई तीस मारखां नहीं बन जाता।
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