महेश पाटिल को चक्रव्यूह में फंसाने के पीछे शिवसेना का दिमाग !

(कर्ण हिन्दुस्तानी)

भारतीय जनता पार्टी के डोम्बिवली ग्रामीण मंडल अध्यक्ष और तेज़तर्रार नगरसेवक महेश पाटिल को कुणाल पाटिल नामक नगरसेवक की हत्या की सुपारी देने के मामले में अब राजनीतिक साज़िश का पर्दाफाश होने लगा है। इस मामले की जांच भले ही हफ्ता वसूली विरोधी पथक कर रहा है मगर सूत्रों पर यदि विश्वास किया जाए तो इस पथक को दिशा निर्देश शिवसेना के जिला स्तर के नेतागण ही दे रहे हैं। महेश पाटिल को विभिन्न मामलों में फंसा कर उसका राजनीतिक सफर खत्म करने की साज़िश किये जाने की बात महेश पाटिल की बहन और नगरसेविका डॉ सुनीता पाटिल ने की है।
सुनीता पाटिल ने कहा कि बीजेपी के लिए अपनी पूरी ताक़त लगाने वाले महेश पाटिल ने चुनाव के दौरान ना सिर्फ शिवसेना के नेताओं की राजनीती को टक्कर दी बल्कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राव साहेब दानवे पाटिल के खिलाफ अपमानजनक शब्द बोलने वाले शिवसेना के डोम्बिवली शहर प्रमुख भाऊ चौधरी के मुँह पर कालिख पोत दी थी। खोनी ग्रामपंचायत के सरपंच के चुनाव में भी महेश पाटिल ने अपनी राजनीतिक परिपक़्वता का उदाहरण दिखाते हुए खोनी में बीजेपी का सरपंच बनया। जबकि खोनी में आठ में से छह सदस्य शिवसेना के थे। इसी मामले में महेश पाटिल पर डकैती और मार पीट का मामला दर्ज़ हुआ था , जबकि सभी जानते हैं कि नगरसेवक जैसे पद पर रहते हुए कोई भी डकैती जैसा अपराध क्यों करेगा ? इसके अलावा चुनावों के दौरान मनसे के उपजिला प्रमुख शरद गंभीर राव और शिवसेना के कल्याण जिला प्रमुख गोपाल लांडगे ने भी महेश पाटिल के खिलाफ राजनीतिक प्रतिद्वंदता के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाई थी कि उनकी जान को महेश पाटिल से खतरा है।
शिवसेना को हर मौके पर मात देने वाले महेश पाटिल को जिस कुणाल पाटिल की हत्या की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है , वह कुणाल पाटिल शिवसेना का ही मोहरा है। क्योंकि जिस वार्ड से कुणाल पाटिल ने मनपा चुनाव लड़ा था उस वार्ड में शिवसेना ने कुणाल को समर्थन देते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था। जबकि बीजेपी ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। महापौर चुनाव में कुणाल पाटिल ने शिवसेना को वोटिंग की थी। इसके बाद कुणाल पाटिल ने स्थाई समिति में प्रवेश करने की मंशा से बीजेपी के कुछ लोगों से नज़दीकियां बढ़ानी शुरू कर दी। वहीँ दुसरी तरफ
बीजेपी को हर चुनाव में विजयी बनाने का स्वप्न देखने वाले महेश पाटिल ने डोम्बिवली में अपने बल पर दर्जन भर नगरसेवक चुन कर लाये। जिससे बीजेपी में महेश पाटिल का राजनीतिक कद बढ़ने लगा। हर कदम पर शिवसेना को बौना साबित करने के महेश पाटिल के लगातार प्रयास की वजह से ही महेश पाटिल शिवसेना के निशाने पर हैं। नगरसेविका डॉ सुनीता पाटिल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हफ्ता वसूली विरोधी पथक के अधिकारियों पर शिवसेना के एक जिला स्तरीय नेता ने लगातार दवाब बनाया हुआ है कि महेश पाटिल को किसी भी हाल में इस मामले में मज़बूती से लटकाया जाए। जबकि पुलिस के सूत्रों पर यदि विश्वास किया जाए तो पुलिस भी इस राजनीतिक दवाबतंत्र से परेशान है। मगर शिवसेना सत्ता में होने से पुलिस विभाग भी हताश होकर बैठा है।

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