मैडम का बयान और मूर्खानंद जी की व्याकुलता(हास्यम – व्यंग्यम ) 

(मुहूर्त नाथ )
सुबह का समय था और मैं बालकनी में खड़ा होकर उदय होते सूर्य को देख रहा था तभी मेरी पत्नी श्री ने आवाज़ लगाकर बताया कि मेरे मित्र मूर्खानंद जी आये हैं। अलसुबह मूर्खानंद जी के  आने की बात सुन कर मैं थोड़ा घबरा गया , फिर भी बालकनी से कमरे की ओर जाना था इसलिए गया। सामने सोफे पर मूर्खानंद  जी पैर पसारे अखबार पढ़ रहे थे। मुझे सामने से आता देख बोले आओ भाई आओ , बैठो। मुझे ऐसे लगा जैसे मैं किसी और के घर में हूँ और सामने वाला मुझे बैठने को बोल रहा हो। …… खैर बैठना तो था ही , मैंने बैठते हुए पत्नी को कहा मूर्खानंद जी के लिए चाय ले आओ। …. मूर्खानंद जी ने हाथ हिलाकर मुझे मना किया , फिर बोले दरअसल मैंने भाभी जी को चाय का आर्डर दे दिया है , तुम भी पी लेना। …… मैंने कुछ बोलने के लिए मुँह खोलना चाहा तभी मूर्खानंद जी बोल उठे , अरे मुहूर्त नाथ आज का अखबार पढ़ा क्या ? मैंने कहा हाँ पढ़ा , क्यों कुछ ख़ास है क्या ? …… मूर्खानंद जी बोले ख़ास नहीं होता तो इतनी सुबह क्या मैं तुम्हारा चेहरा देखने यहां आता ?…….. मैंने अपने ही घर में पहली बार अपनी बेज़्ज़ती होते देखी थी।      खैर , मैंने कहा बताइये क्या खबर है। ………… मूर्खानंद जी ने मुझे लगभग बेवकूफ समझते हुए कहा , मैडम का बयान छपा है। ….. मैंने कहा कौन सी मैडम ? कहाँ की मैडम ? ………….. मूर्खानंद जी ने  फिर मुझे घूरते हुए देखा और बोले हिन्दुस्तान में बहन जी हैं , अम्मा हैं और हिडिम्बा हैं , इन सबको तुम जानते हो ? मैंने कहा हाँ , जानता हूँ , …. मेरा इतना कहना था कि मूर्खानंद जी बोल उठे। …. फिर तुम मैडम को क्यों नहीं जानते ? हमारी राष्ट्रिय मैडम को ना पहचानने का जो जुर्म तुम कर रहे हो , इसकी तुम्हें सज़ा मिल सकती है।  मैंने घबरा कर पूछा सज़ा और मुझे ? भला मैडम से मेरा क्या लेना देना ? मूर्खानंद जी बोले मैडम को सभी जानते हैं , उनका बयान भी सभी पढ़ते हैं और आपने ना तो उनका बयान पढ़ा और ना ही उनको जानने की कोशिश की है।  …… मैं अब  घबराने  की कोशिश करने के बजाए हंसने के मूड में आ गया था क्योंकि मैं समझ गया था कि मूर्खानंद जी पप्पू की अम्मा का ज़िक्र कर रहे हैं।  मैंने मूर्खानद जी से पूछा क्या बयान आया है ? उन्होंने कहा कि २०१९ में हमारी सत्ता आएगी , हम फिर से सत्ताधारी बनेंगे , हम ही हम होंगे। ……. मैंने    मूर्खानंद जी से कहा ख्वाब देखने पर हमारे देश में कोई प्रतिबंध नहीं है , मैडम ने भी ख्वाब देखा है। इस पर मूर्खानंद जी ने ने कहा ख्वाब देखने पर कोई प्रतिबंध नहीं है , यह बात सच है लेकिन दिन में खुली आँखों से ख्वाब कोई देखता है क्या ? उसके लिए सोना पड़ता है , मैडम की पार्टी सो गई है और मैडम जागते हुए ख्वाब देख रही है। मूर्खानंद जी की इस बात का मेरे पास कोई ज़वाब नहीं था।
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