मोदी और महाविपक्ष !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
देश में हुए उपचुनावों में बीजेपी को पराजय का मुँह देखना पड़ा। बीजेपी की हार को मोदी की हार देखने और मानने वालों को चाहे बड़ी ख़ुशी हुई हो , लेकिन सभी जानतें हैं कि मोदी की वजह से ही देश की गरिमा बची हुई है। तेल कंपनियों से उधार तेल लेकर उसे नगद में बेच कर वह पैसा खा जाने वाला विपक्ष क्या यह नहीं जानता कि मोदी ने अब यह क़र्ज़ उतारना शुरू किया है। विदेशों में भारत की छबि को नदारद करने वाली कांग्रेस क्या यह नहीं जानती कि २०१४ के बाद विदेशों में भारत की साख बनी है।  वरना हर साल विश्व बैंक के सामने कटोरा लेकर भारत खड़ा रहता था। नगर निगम को यदि बसें भी खरीदनी रहती तो केंद्र और राज्य सरकारें विश्व बैंक के सामने झोली फैला कर खड़े हो जाते थे। कांग्रेस ने और कांग्रेस का साथ देने वाले दलों ने भले ही समय समय पर देश को आधुनिक तकनीक दी हो मगर यह सब क़र्ज़ में देश को डुबा कर ही दी है। आज आज़ादी के इतने सालों बाद हालात यह हैं कि देश के युवाओं को अगर अपनी शिक्षा भी पूरी करनी है तो बैंक से क़र्ज़ लेना पड़ता है। क्या यही तरक्की की है हमारे देश ने विगत सत्तर सालों में ? आज भी किसान को उसकी फसल का सही भाव नहीं मिल पा रहा है क्योंकि विगत सत्तर सालों में सिंचाई के साधनों में कोई बदलाव नहीं लाया गया। किसानों और बाज़ार के बीच दलालों को खड़ा कर दिया गया।  किसानों को बैंकों के बजाए साहूकारों से क़र्ज़ लेने की आदत डाल दी गई।  यह सब किसके शासन काल में हुआ ? आज यदि किसानों की हालत खस्ता है तो उसके लिए मौजूदा सरकार नहीं बल्कि पिछली कांग्रेसी सरकारें जिम्मेदार हैं। महिलाओं के लिए  कई योजनाएं बनाई गई मगर किसी भी तरह का फायदा ज़रूरतमंद महिलाओं तक नहीं पहुंचा। इसके लिए क्या महज चार साल से सत्ता पर बैठी मोदी सरकार ज़िम्मेदार है ? देश में कुपोषण बढ़ा है तो इसके लिए पिछली सरकारों की नीतियां ज़िम्मेदार है। जिन नीतियों की वजह से हर पेट को भोजन तक नहीं पर्याप्त मात्रा में मिल सका। चुनाव आते ही किसी कुपोषित बच्चे को गोद में उठाकर तसवीरें खिंचवाने वाले कोंग्रेसियों को यह क्यों नहीं दिखा कि उनके राज में कुपोषण पैर पसार चुका है। आज मोदी का विकास के नाम पर मजाक उड़ाने वालों की गिरेबान पकड़ कर पूछने का दिल करता है कि अब तक सत्ता में रहकर सत्तर सालों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने क्या किया ? मोदी ने जब सभी की पोल खोलनी शुरू की तो सभी राजनीतिक भेड़िये एक मंच पर आ गए ! क्यों हुआ यह एकता का दिखावा ? क्योंकि विपक्ष को पता है कि अब २०१९ में विपक्ष को जनता गायब करने वाली है। मोदी की रणनीति के सामने सभी असफल होंगें। इन राजनीतिक भेड़ियों को २०१९ में जनता ही सबक सिखाएगी।
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