राष्ट्रवादी कांग्रेस और मनसे के बीच आंदोलनों को लेकर सांठगांठ उजागर

जैसे जैसे 2019 लोकसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे राष्ट्रवादी कांग्रेस और मनसे की छुपी सांठगांठ प्रकट रूप से सामने आ रही है देखा यह गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस और मनसे ने विगत कुछ समय से मिलकर आंदोलनों को आगे बढ़ाने का काम किया है चाहे बुलेट ट्रेन की बात हो या आयातित पाकिस्तानी शक्कर का मामला हो या फिर टोल नाकों पर आंदोलन करने का काम हो .

आज मुलुंड चेक नाका पर विधायक जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में टोल नाकों पर टोल वसूली के विरोध में आंदोलन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल थे आंदोलनकर्ताओं की मांग है कि जब तक मुंब्रा बाईपास का काम पूरा नहीं हो जाता तब तक टोल नाकों पर वसूली बंद की जाए .
दूसरी एक घटना में जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दहिसर मोरी स्थित शक्कर के गोदामों में रखे कथित पाकिस्तान से आयातित शक्कर के बोरों को फाड़कर आंदोलन किया इस मौके पर आव्हाड ने कहा कि जहां एक तरफ किसान और शक्कर कारखाने भयंकर संकट के दौर से गुजर रहे हैं वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान प्रेम उजागर हो गया है और वह लाखों मेट्रिक टन शक्कर कैसे आयात कर सकते हैं जब देश में शक्कर का उत्पादन इस साल अधिक मात्रा में हुआ है

इसी तरह का आंदोलन मनसे के कार्यकर्ताओं ने भी शक्कर गोदामों में घुसकर कथित पाकिस्तान से आई शक्कर का विरोध पाकिस्तान से आए शक्कर के बोरों को फाड़कर लगभग 2000 मेट्रिक टन शक्कर नष्ट की उनके अनुसार यदि सरकार ने इन पाकिस्तानी शक्कर के गोदामों पर ताले नहीं लगाए तो इन को आग के हवाले कर दिया जाएगा ऐसी भी चेतावनी आंदोलनकारियों ने दी है। आंदोलनकारियों का यह भी कहना है कि एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम मोदी सरकार कर रही है पाकिस्तान हमारा शत्रु राष्ट्र है यहां किसान गन्ने का उचित दाम ना मिलने के कारण आत्महत्या कर रहा है वही एक दुश्मन देश से शक्कर मंगाकर किसानों को और कारखानों को बंद करने का षड्यंत्र यह सरकार कर रही है ।

बता दें कि मनसे ने राज्य भर के व्यापारियों को चेतावनी दी है कि वह आयातित पाकिस्तानी शक्कर का व्यापार ना करें अन्यथा नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें यहां यह बताना भी लाजमी है कि आज से पहले कभी भी किसी भी आंदोलन में सरकार या व्यापारियों का नुकसान करने का काम आंदोलनकारियों ने नहीं किया था इस तरह का उग्र आंदोलन करने के पीछे मनसे व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मंशा वर्तमान मोदी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास बताया जा रहा है।
यहां बता दें कि विगत दिनों बुलेट ट्रेन के लिए सर्वे कर रहे सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ भी मनसे के कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए मारपीट की थी इस आंदोलन को भी अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था।

 

 

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