लोकसभा चुनाव – विपक्ष और बीजेपी का इम्तिहान !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
आने वाले वर्ष में लोकसभा चुनावों में किसे बहुमत मिलेगा , किसके हाथ में सत्ता की कुंजी होगी ? यह अभी से कोई नहीं बता सकता। मगर एक बात तो स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार के सर्वेसर्वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावों को मद्देनज़र रख कर कोई भी योजना लागू नहीं कर रहे हैं। मोदी का ध्यान चुनावों की जीत हार ना होकर हिन्दुस्तान को दुनिया में अग्रिम स्थान पर कैसे रखा जाए इस पर ही है। अब तक की केंद्र की सरकारें तीसरे साल में ही जनता को लुभावने वादे कर चुनावों की आहट का एहसान करवाने लगतीं थीं। जनता को चावल – बिजली – यहां तक कि टीवी तक मुफ्त में दिए जाते थे। खुद तो देश की तिजोरी का माल खाया ही जाता था , जनता को भी मुफ्तखोरी की आदत डाल दी गई थी। गेंहू – चावल – ज्वारी और ना जाने क्या ? क्या ? मुफ्त में देने वाली पिछली सरकारें यह सब जनता द्वारा भरे जाने वाले कर में से ही देतीं थीं। कोई भी राजनीतिक दल कभी अपने फंड से किसी को मुफ्त में कुछ भी देने का वादा नहीं करता था। सभी देश की तिजोरी को अपनी मिलकियत समझ कर लूटने का ही वादा करते थे। बस सभी का तरीका अलग – अलग था। मोदी सरकार आने के बाद इन सब पर बड़े पैमाने पर रोक लगाने का काम किया गया। मौजूदा सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखे कटाक्ष किये और जनता की नज़र में खुद को दानशूर साबित करने की कोशिश भी की। मगर आज का युवा मुफ्तखोरी से तंग आ चुका है और यही वजह रही कि युवा को मोदी की नीतियां पसंद आईं। २०१९ के आम चुनावों के पहले ही मुख्य विपक्षी दल यानि कि कांग्रेस ने मोदी सरकार को नकारा साबित करने की हर सम्भव और असम्भव कोशिश की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी तो इस तरह से देश भर में भाषण दे रहे हैं जैसे विगत सत्तर सालों से देश पर मोदी ही राज कर रहे हैं और देश के बिगड़े हालातों के लिए मोदी ही ज़िम्मेदार हैं। हर बार की तरह इस बार भी तीसरा मोर्चा बना और बिखरा भी। इस तीसरे मोर्चे में हर व्यक्ति प्रधानमंत्री बनना चाहता है। अब यही तीसरा मोर्चा खड़ा होने का प्रयास कर रहा है। मायावती , मुलायम , ममता बनर्जी और ना जाने कौन कौन एक दूसरे से गले मिल रहे हैं। सभी का एक ही निशाना है और वह है नरेंद्र मोदी। हिन्दुस्तान की जनता ने जिस नरेंद्र मोदी को बहुमत से चुन कर संसद में भेजा है उस मोदी को वह लोग गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं जिनके दल को विपक्ष बनने लायक भी सीटें प्राप्त नहीं हुई हैं। हर छोटी – छोटी बात पर मोदी को कोसने वाले दरअसल मोदी की आंधी से खुद को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मगर वह यह नहीं जानते कि मोदी की आंधी के सामने टिकना उतना ही मुश्किल है जितना तीसरे मोर्चे की एकता को बनाये रखना है। कुल मिलाकर २०१९ के लोकसभा चुनाव विपक्ष के लिए तो इम्तिहान है ही बीजेपी के लिए भी इम्तिहान की ही घड़ी है क्योंकि विपक्ष अब कमर के नीचे की भाषा भी बोलने से परहेज नहीं कर रहा है।

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