वाह रे दिग्गज पत्रकारों, वाह रे तेरी कुर्वानी

(कर्ण हिंदुस्तानी )
विगत एक दो दिन से सोशल मीडिआ पर कुछ पत्रकारों की व्यथा काफी बड़े पैमाने पर वायरल हो रही है। कोई कह रहा है कि मौजूदा सरकार के खिलाफ स्पष्ट भूमिका रखने की वजह से फलां पत्रकार की नौकरी पर आंच आ गई और उस दिग्गज पत्रकार ने खुद ही इस्तीफा दे दिया। कोई मौजूदा सरकार के आगे ना झुकने की बात कर रहा है। बहुत ही अच्छी बात है , किसी भी पत्रकार को किसी भी सरकार की गलत नीतियों के सामने नहीं झुकना चाहिए। लेकिन किसी भी पत्रकार को मन में एक विशेष दल की सरकार के खिलाफ भावनाएं रख कर भी पत्रकारिता नहीं करनी चाहिए। आम तौर पर कहा जाता है कि पत्रकार को किसी एक विचारधारा मन में रख कर पत्रकारिता नहीं करनी चाहिए। मगर जिन पत्रकारों की व्यथा सोशल मीडिआ पर वायरल हो रही है वह सभी पत्रकार वामपंथी विचार धारा को लेकर ही पत्रकारिता करते आये हैं और आगे भी करते रहेंगे क्योंकि इन सभी वामपंथी विचार धारा के पत्रकारों को वामपंथ ही सर्वोपरि लगता है। तमाम सरकारी सुविधाएं लेने के बाद भी सरकार को गालियां देने वाले इन वामपंथी विचारधारा के पत्रकारों को अब मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार बुरी लगने लगी है। यह पत्रकार यह नहीं जानते कि यह किसी चॅनेल में नौकरी कर रहे हैं , इस नौकरी के एवज़ में इन पत्रकारों को हर माह लाखों रूपये तनख्वाह मिलती है। जब नौकरी कर रहे हो तो मालिक की विचारधारा को अपनाना ही होगा , यदि ऐसा नहीं है तो खुद निकालो अपना अखबार , खुद शुरू करो अपना डंडा छाप खबरिया चॅनेल। अपने अखबार को तो वॉचमेन को बेच देते हैं और बातें करते हैं कि हम पत्रकारिता और सच्ची पत्रकारिता के हितैषी हैं ! आज की तारीख में कौन सा अखबार है जिसकी हेड लाइन सम्पादक तय करता है ? कौन सा न्यूज़ चॅनेल है जिसमें सम्पादक तय करता है कि दिन भर फलां खबर ज़रूर चलेगी। सब तो व्यवसायिक हो गया है। जब कोई पत्रकार खुद को दिग्गज साबित करते हुए खुद के लिए साल का लाखों का पैकेज माँगता है तब वह यह क्यों नहीं सोचता कि अखबार अथवा न्यूज़ चॅनेल का मिलिक उसको यह रकम कहाँ से देगा ? इस सच्चाई को कोई भी बयां नहीं करना चाहता। अरे अगर इतनी ही सच्ची पत्रकारिता की खुजली है तो सरकार से ली गई हर सुविधा यहां तक कि अधिस्वीकृत पहचान पत्र भी वापस करो। कोई हक़ नहीं है एक सच्चे पत्रकार को कोई भी सरकारी सुविधा लेने का। अपनी व्यथा सोशल मीडिया पर डालने से बेहतर होगा कि खुद के अंदर की वामपंथी विचारधारा को मार डालो।

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