शिवसेना के पास राज्य सरकार से अलग होना एकमात्र विकल्प ??

( अज्ञात शर्मा )

महाराष्ट्र में सत्ता में रहकर भी शिवसेना मंत्रियो को ज्यादा अधिकार नहीं है.शिवसेना विधायको को निधि आबंटित नहीं होने के कारण वे अपने क्षेत्र में कोई भी विकास कार्य नही कर पा रहे है.जिससे शिवसेना की छबी धूमिल होरही है समय रहते अगर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कड़े निर्णय नहीं लिए तो, शिवसेना नेताओ को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कठिनाइयों का सामना करना पड सकता है ऐसे अनेक विचार आज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के समक्ष शिवसेना कोटे से राज्य में मंत्री,सांसद और विधायको ने सामूहिक रूप से प्रकट किये. शिवसेना प्रमुख के निवास मातोश्री में आयोजित इस बैठक में राज्य में शिवसेना कोटे से मंत्री सनासाद व् विधायक के साथ सिर्फ प्रमुख पदाधिकारी ही अपेक्षित थे.

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवसेना नेता संजय राउत ने बैठक में हुए चर्चाओ का सिरे से  बताया  की सभी शिवसेना मंत्री विधायक राज्य की सत्ता में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के नीतियों से आक्रोशित है इन्हें अपने क्षेत्र में विकास कार्य करने,सरकार से निधि नहीं मिल रहा, शिवसेना मंत्रीओ को भी राज्य सरकार में  सीमित अधिकार है सभी उपस्थित नेताओ ने एकमत से शिवसेना को सरकार से अलग हटकर विरोधी खेमे में बैठ जाने का सुझाव दिया,ऐसे में ये बात तो साफ़ हो गयी की अब इसमें प्रमुख भूमिका शिवसेना प्रमुख ही निभाएंगे .

गत विधान सभा चुनाव के पहले तक शिवसेना की स्थिति ठीक थी,और इसी सोंच में शिवसेना ने अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा था.लेकिन शिवसेना की आशा के विपरीत इस चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी,अपनी करारी हार को लम्बे समय तक स्वीकार नहीं कर पाई थी और भाजपा से मुख्यमंत्री पद शिवसेना को देने की मांग पर अड गयी थी . विवाद होते रहे, और भाजपा ने बिना पूर्ण बहुमत के सरकार बना ली,मुख्यमंत्री के साथ अन्य भाजपा  मंत्रियो की घोषणा भी कर दी, और थक हार कर शिवसेना विरोध में न जाकर थोड़े दिन बाद भाजपा सरकार में शामिल हो गई,यही हाल विभिन्न मनपा के साथ मुम्बई मनपा चुनाव में भी हुआ, दोनों दल आमने सामने लडे,शिवसेना का प्रतिनिधित्व का ग्राफ लगातार घटता गया. और भाजपा का प्रभुत्व बढ़ता गया , अब २०१९ में अगली लोकसभा का चुनाव है, और भाजपा अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने की मोर्चाबंदी कर रही है, ऐसे में समय रहते शिवसेना को सचेत हो कर सक्रीय हो जाना एकमात्र विकल्प है

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