शिष्टाचार में फेल हुए मुख्यमंत्री फडणविस,संघर्ष समिति के नेताओ को चाय भी नही पिलाई.

कल्याण डोम्बिवली मनपा के २७ गावो के १० गावो में ग्रोथ सेंटर बनाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णविस के नेतृत्व में शुक्रवार को मंत्रालय में एक बैठक बुलाई गयी थी जिसमे ठाणे जिले के पालक मंत्री एकनाथ शिंदे,रायगढ़ के पालक मंत्री रविन्द्र चौहान,सांसद डा श्रीकांत शिंदे,कल्याण मनपा महापौर राजेन्द्र देवलेकर, इन ग्रामीण क्षेत्रो के नगरसेवक और सर्व पक्षीय ग्रामीण संघर्ष समिति के नेताओ को भी बुलाया गया था.बैठक में मुख्यमंत्री फडणविस ने यहा के २७ गावो में से सिर्फ १० गावो में ग्रोथ सेंटर बनाए जाने की बात रखी,उनमे ग्रामीणों को अपनी जमीन देने की अपील की.मुख्यमंत्री ने जमीन देने वाले ग्रामीणों को इसका उचित मुआवजा भी देने की बात कही.

मुख्यमंत्री के कार्यालय में होने के बावजूद संघर्ष समिति के नेताओ ने अपनी बात प्रखर ढंग से मुख्यमंत्री के समक्ष रखी.उनके अनुसार पहले बादे के अनुसार मुख्यमंत्री इन २७ गावो में नगरपालिका की घोषणा करे फिर ग्रोथ सेंटर के निर्माण में सहयोग की अपेक्षा करे.मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इन २७ गावो में नगरपालिका स्थापित करने की बातो पर सरकार के सकारात्मक रुख होने की बात कही.

लेकिन बैठक खत्म होते ही २७ गावो के संघर्ष समिति के नेताओं के साथ जनप्रतिनिधि भी  असन्तुष्ट दिखे.

उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने २७ गावो में से सिर्फ १० गावो में ग्रोथ सेंटर बनाने की बात क्यों की ?

अनेक जनप्रतिनिधियो के अनुसार उनलोगों ने इन २७ गावो में लगातार हो रहे अवैध निर्माण की अनेक शिकायत मुख्यमंत्री से की थी.मुख्यमंत्री ने इस पर भी कोई चर्चा नहीं की.

कल्याण मनपा चुनाव के 3 वर्ष बाद पहली बार मुख्यमंत्री ने बैठक ली.और इस बैठक में किसी भी नगरसेवको को अपना पक्ष रखने नही दिया गया.जबकि कल्याण मनपा की तरफ से भी इन २७ गावो में कोई विकास कार्य नही शुरू किया गया है.

अनेक नेताओं के अनुसार सिर्फ १० गावो में ग्रोथ सेंटर बनाए जाने पर इसका सीधा सीधा फायदा यहाँ के लोधा बिल्डर को होगा,उनके अनुसार इन १० गावो में ७० प्रतिशत से ज्यादा जमीन लोधा बिल्डर ने ग्रामीणों से पहले ही ख़ारिद चुका है.

सबसे ज्यादा गुस्सा इस बैठक में लोगो का मुख्यमंत्री से इस लिए रहा क्योकि इतने दूर से जाने के बावजूद  मंत्रालय में एक घंटे से अधिक समय तक उन्हें मुख्यमंत्री के आने का इन्तजार करना पड़ा,वहि मुख्यमंत्री कार्यालय में इन्हें चाय तक नहीं पिलाई गयी.ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री कार्यालय में दोपहर १२ बजे की बैठक थी इसी आधार पर डोम्बिवली से लोग मुम्बई की ट्राफीक के डर से सुबह ९ – १० बजे घर से  निकल गए थे और ज्यादातर लोग मुख्यमंत्री कार्यालय में ११ बजे तक पहुच गए थे.बैठक दोपहर १ बजे शुरू हुई और १ घंटे से अधिक समय तक चली इस दौरान आगंतुको को सिर्फ पानी पिलाया गया. संघर्ष समिति के पदाधिकारी के अनुसार हम लोग वहा चाय नाश्ता करने नही गए थे.और हम में से हरेक सदस्य इतना सक्षम है के मुख्यमंत्री के साथ उनके पुरे ताफे को भोजन करा सकता है.लेकिन मेहमानो को चायनाश्ता कराना एक शिष्टाचार होता है जिसमे मुख्यमंत्री पूरी तरह फेल हुए है.

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