श्रीनिवास वनगा का शिवसेना में प्रवेश संघ को नागावर गुजरा है, दिए है कड़े निर्देश.

(राजेश सिन्हा)

पालघर लोकसभा चुनाव के मतदान के लिए महज 7 दिन बाकी है इस चुनाव में शिवसेना के साथ भारतीय जनता पार्टी ने अपने-अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है कल रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भाषण  से यह साफ लगा कि भाजपा पालघर लोकसभा सीट जीतने के लिए बेहद आतुर है और भाजपा का यह प्रयास शायद सफल भी हो जाए लेकिन यहाँ से भाजपा के सांसद रहे स्वर्गीय चिंतामन वनगा के परिवार को दरकिनार कर के भाजपा की जीत का कोई मायने नही रहेगा. ओछी और स्वार्थी राजनीती में कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ चुकी भाजपा पूर्व स्वर्गीय सांसद चिंतामण वनगा के बेटे श्रीनिवास वनगा के भाजपा को राम राम कह कर शिवसेना से संसदीय चुनाव लड़ने के निर्णय के नजरंदाज कर भी देती.लेकिन भाजपा का यह खेल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नागावार गुजरा है और उनकी कड़ी फटकार के बाद भाजपा नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री फडणविस भी वनगा परिवार को भाजपा में लाने के लिए आतुर दिख रहे है.

क्योंकि भाजपा पर कठिन उपेक्षा का आरोप लगाते हुए स्वर्गीय सांसद चिंतामन वंगा के पुत्र श्रीनिवासन वनगा ने शिवसेना में प्रवेश कर लिया और शिवसेना ने श्रीनिवास वनगा को वहां से अपना लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया है इसी पर कल मुख्यमंत्री की पालघर लोकसभा क्षेत्र में संपन्न आमसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस ने शिवसेना पर धोखेबाजी करने का आरोप लगाया उनके अनुसार 1 मई को उद्धव ठाकरे से उन्होंने फोन पर बात की थी जिसमें उन्होंने वनगा परिवार को टिकट देने की बात कही थी

बावजूद इसके शिवसेना ने श्रीनिवास वनगा को 3 मई को शिवसेना में प्रवेश देकर उन्हें पालघर लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया मुख्यमंत्री के अनुसार यह शिवसेना की धोखेबाजी है. जबकि चिंतामन वनगा के पुत्र ने यह बात अनेक बार सार्वजनिक तौर पर कही है की उनके पिता की 30 जनवरी को मृत्यु होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री फडणवीस उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए और उनके पिता के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी मुख्यमंत्री ने अपनी उपस्थिति दर्ज की लेकिन पालघर लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद से पार्टी के सभी नेतागण उनसे और उनके परिवार से कन्नी काटने लगे यहां तक कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से भी अनेकों बार संपर्क किया लेकिन हर बार उन्हें कोई सही उत्तर नहीं दिया गया
मुख्यमंत्री ने कल रविवार को आयोजित पालघर में अपने आमसभा में यह बात भी साफ कही कि लोकसभा चुनाव के बाद श्रीनिवास वनगा के हार के बाद उनकी मातोश्री के लिए दरवाजा हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जायंगे, जबकि भारतीय जनता पार्टी का दरवाजा उनके लिए  हमेशा के लिए खुला रहेगा.भले ही मुख्यमंत्री का ये बयान खेल उनके हाथ से फिसलने के बाद आया हो लेकिन क्या उन्हें श्रीनिवास के भाजपा नेतृत्व द्वारा लगातार उपेक्षा किये जाने की जानकारी नही थी. क्योकि भाजपा सूत्र ही बताते है कि भाजपा नेतृत्व को श्रीनिवास वनगा पर जीत का भरोसा नही था.वे लोग इसे परिवारवाद से भी जोड़ रहे थे,बल्कि उन्होंने यहाँ से अपना विकल्प उम्मीदवार भी चुन लिया था.

लेकिन यह बात राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ को नागावार गुजरी,और संघ के सूत्रों के अनुसार संघ ने भाजपा नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री फडणविस को वनगा परिवार को  भाजपा में लाने का कडा निर्देश दिया है इसी लिए मुख्यमंत्री शिवसेना द्वारा वनगा परिवार के श्रीनिवास वनगा को पालघर से लोकसभा सीट के लिए उम्मेदवारी की घोषणा के साथ ही शिवसेना से मित्रता निभाने का वास्ता दे रहे थे.वही कल अपनी सभामें शिवसेना को धोखेबाज कहने से नहीं थक रहे थे.
आईए एक नजर डालते हैं पालघर लोकसभा चुनाव पर चिंतामन वनगा पर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर,

राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ देशभर में अपने सामाजिक,वैचारिक और संगठनात्मक कामों के लिए जाना जाता है आदिवासी बहुल पहले डहाणु और अब पालघर लोकसभा सीट पर आजादी के बाद से कम्युनिस्टों और कांग्रेसियों का वर्चस्व था उस दौरान विदेशी मशीनरी द्वारा आदिवासी गांवो में सेवा के नाम पर गांव के गांव  का ईसाई धर्म में धर्मांतरण करवा दिया गया है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन्हीं परिस्थितियों को भाप कर और हिंदुओं का धर्मांतरण रोकने के साथ आदिवासी समाज का सर्वागिण विकास के लिए यहां अनेक सेवाभावी संस्थाएं शुरू की है 50 वर्षों से अधिक समय से शुरू इन संस्थाओं में यहां के तलासरी स्थित वनवासी कल्याण आश्रम प्रमुख है जहां यहां के सभी आदिवासी पाड़ों (गाव) से हर वर्ष हजार से अधिक छात्र शिक्षा व संस्कार प्राप्त करते हैं ऐसे अनेक प्रकल्प राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  की विभिन्न शाखाएं यहां सिर्फ आदिवासियों के सर्वागीण विकास  के लिए चला रहे हैं

चिंतामन वनगा संघ के यह कार्य शुरू करने के शुरुआती दौर के बाल स्वयंसेवक रहे हैं उन्हें उनके कुशल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए हि संघ ने कल्याण के वरिष्ठ स्वयंसेवक माधवराव काणे के निवास पर उनके रहने और शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की थी संघ के संस्कार में पले-बढ़े चिंतामन वनगा को अपने गांव के साथ तलासरी पालघर डहानु जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में संघ के काम को बढ़ाने में अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ा है उस दौरान कम्युनिस्टों ने उनके घर पर हमला कर दिया थाऔर उनके घर को जलाने की कोशिश हुई थी.पालघर डहाणुमें आदिवासी सामाज के विकास के लिए कार्यरत संघ के विभिन्न संस्थाओ के लिए स्व. वनगा एक पर्मुख श्रोत थे.

वाकया 1999 लोकसभा चुनाव का है जब तात्कालीन डोंबिवली भाजपा अध्यक्ष स्व. नंदू जोशी के नेतृत्व में सौ से अधिक भाजपा कार्यकर्ता डहाणु संसदीय चुनाव में चिंतामन वनगा के मदद के लिए पहुंचे थे उस दौरान की स्थिति थी की भाजपा के पास पालघर लोकसभा क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर पोलिंग एजेंट खड़ा रखने का भाजपा सदस्य नहीं था डोंबिवली व अन्य जगहों से गए लोगों ने वहां पहुंच कर पोलिंग एजेंट का काम किया था और डोंबिवली अध्यक्ष स्वर्गीय नंदू जोशी के प्रयास के कारण ही उस वर्ष पूरे  डहानु लोकसभा सीट पर सभी मतदान केंद्रों पर मतदान प्रतिनिधि  की नियुक्ति हो पाई थी  उस वर्ष चुनाव में चिंतामन वनगा की हार हुई थी लेकिन अगली बार के चुनाव मेंउन्हें जीत मिली थी उस दौरान डोम्बिवली वासियों ने अनेक बार चिंतामन वनगा केघर का खाना खाया था और उनके परिवार की सादगी और संघ परिवेश  को बेहद नजदीक से जाना था पूरा परिवार पूरी तरह से संघ के परिवेश में पला बढ़ा है उनके पुत्र और शिवसेना उम्मीदवार श्रीनिवासन वनगा ने भी  तलासरी के वनवासी कल्याण आश्रम में ही शिक्षा दीक्षा ली है

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