समस्या कौन?फेरीवाले या नेतागण !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
मुंबई और उसके आसपास के उपनगरों में जब भी कोई राजनीतक दल अपनी पार्टी की गिरती हुई साख को उठाने की जद्दोजहद में लगता है तो उसका निशाना सिर्फ और सिर्फ फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले गरीब तबके के लोग ही होते हैं।
जनभावनाओं को उकसा  कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले इन राजनीतिक दलों में संवेदनाएं मर चुकी हैं। परप्रांतियों के नाम पर अपनी राजनीतिक दूकान चलाने वालों की वजह से मुंबई और आस पास के उपनगरों में सड़क पर व्यवसाय करने वालों के दिलों में इन राजनीतिक दलों का खौफ बन चुका है। किसी भी हादसे को सामने रख कर फेरीवालों को परेशान करना कुछ राजनीतिक दलों का अजेंडा ही बन चुका है। परेल रेलवे स्टेशन के हादसे के बाद एक मृत हो चुके राजनीतिक दल ने फेरी वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।  माँ बहन की अश्लील गालियां देते हुए फेरीवालों के सामान की तोड़ फोड़ करने वाले राजनीतिक गुंडे आखिर क्यों और किसी शह पर यह सब करते हैं ? सही मायने में देखा जाए तो यह अघोषित आपातकाल कुछ राजनीतिक दलों ने लगाया हुआ है। किसी भी फेरीवाले का सामान कभी भी तोड़ देना , मारपीट कर खुद को बड़ा साबित  करना , ऊपर से वातानुकूलित कमरों से आदेश निकला और यहां बीच चौराहे पर घमासान मचा देने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को क्या पता कि सुबह से रात दस बजे तक फुट पाठ पर खड़े रह कर मनपा और स्थानीय दादाओं की दादागिरी सहन कर किस तरह से व्यवसाय किया जाता है ? हर माह एक निश्चित रकम मनपा , पुलिस और विभिन्न राजनीतिक दलों के पंटरों को दी जाती है। उसके बाद विभिन्न सार्वजनिक मंडलों की रसीदें फाड़नी पड़ती हैं।  तब जाकर कहीं एक फेरीवाला अपने घर के लिए दो समय के खाने का जुगाड़ कर पाता है। ऐसे में यदि ब्याज उठाकर बेचने के लिया गया सामान ही कोई राजनीतिक दल अपने गुंडों के जरिये तोड़फोड़ दे तो फेरीवाला क्या करेगा ? वह इन गुंडों का प्रतिरोध नहीं करेगा तो क्या उनकी पूजा करेगा ? दरअसल इन राजनीतिक दलों के नेता गण ही सबसे बड़ी समस्या हैं , जो हॉकर यूनियन भी बनाते हैं और हॉकर्स पर जुल्म भी करते हैं , कोई मुझे बताए कि किस राजनीतिक दल की हॉकर यूनियन नहीं है ? ऐसे में एक बात स्पष्ट हो जाती है कि समस्या फेरीवाले नहीं समस्या तो विभिन्न राजनीतिक दल और उनके नेतागण हैं।
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2 thoughts on “समस्या कौन?फेरीवाले या नेतागण !

  • October 30, 2017 at 11:03 pm
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    नेतागण

    Reply
  • October 30, 2017 at 11:46 pm
    Permalink

    मनसे के कार्यकर्ता उत्तरभारतीय लोगो पर हमला कर रहे है उनको किसने हक दिया है किसि को मारने पीटने का अगर आप को किसि चीज से दीक्कत है तो आप सरकार से नाराजगी दीखावो आप गरिब कमजोर फेरी वालों को क्यों मारते हो, उत्तरभारतीय मेहनत मजूरी कर के अपने परीवार का पेट भरते है वो 1500 किलोमीटर अपना गाँव छोड़ कर लड़ाई झगडा करने नहीं आते है उनके अंदर भी भगवान ने ताकत दी है अपनी रक्षा करने की उनको कमजोर समझने का प्र्यास कोई भी पार्टि न करे, कुछ लोग उत्तरभारतीयो के नेता बनते है जब कांग्रेस की सरकार महारास्ट्र मे थी तब भी उत्तरभारतीय लोगो पर हमला होता था तब ये चुप रहते थे और आज उत्तरभारतीयो के नेता बनते है और लोगो को बरगलाते है….. वंदे मातरम

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