सामान्य इस्तेमाल की वस्तुओं पर टैक्स घटाने पर विचार करेगी जीएसटी काउंसिल

( आकाश आनंन्द )

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद की आगामी बैठक 9-10 नवंबर को गुवाहाटी में होनी है.  राज्यों की आपत्तियों को देखते हुए जीएसटी परिषद ने राज्यों के ​मंत्रियों व अधिकारियों की एक समिति गठित की थी  बताया जाता है कि परिषद की बैठक में हाथ से बने फर्निचर, प्लास्टिक उत्पादों तथा शैंपू जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान पर जीएसटी दरों में कटौती पर विचार किया जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक  को होनी है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि कई सामान्य इस्तेमाल की वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की जीएसटी दर को कम करने पर विचार होगा। लघु एवं मझोले उपक्रमों को राहत के लिए समिति उन क्षेत्रों में कर दरों को तर्कसंगत बनाने पर काम करेगी जहां जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्सेशन रेट बढ़ गया है। पहले की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था (इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम) में इन पर उत्पाद शुल्क की दर की छूट थी या इन पर निचली दर से मूल्यवर्धित कर (वैट) लगता था।
जीएसटी को इसी साल एक जुलाई से लागू किया गया है। उसके बाद से जीएसटी परिषद की बैठक हर महीने हो रही है। इन बैठकों में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनसे कंपनियों के साथ साथ उपभोक्ताओं पर भी बोझ कम किया जा सके।

एक अधिकारी ने कहा कि 28 प्रतिशत के स्लैब वाली वस्तुओं पर टैक्स रेट्स को तर्कसंगत किया जाएगा। ज्यादातर रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं पर कर की दर को घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है। इसके अलावा फर्निचर, इलेक्ट्रिक स्विच, प्लास्टिक पाइप पर भी कर दरों की समीक्षा की जा सकती है।
जीएसटी में सभी तरह के फर्निचर पर 28 प्रतिशत कर लगाया गया है। लकड़ी के फर्निचर का ज्यादातर काम असंगठित क्षेत्र में होता है और इसका इस्तेमाल मध्यम वर्ग के परिवारों द्वारा किया जाता है। इसी तरह प्लास्टिक के उत्पादों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। लेकिन शॉवर बाथ, सिंक, वॉश बेसिन, लैवरेटरी पैंस, सीट और कवर आदि पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत तक है।
अधिकारियों ने कहा कि इन पर भी दरों को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। इसके अलावा वजन करने वाली मशीन और कंप्रेसर पर भी जीएसटी को 28 से घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है। जीएसटी परिषद में सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। परिषद पहले ही 100 से अधिक वस्तुओं पर दरों को तर्कसंगत कर चुकी है।

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