60 साल सेवा के नाम पर देश को लूटने वाली “कांग्रेस” को अब हर्जाना चाहिए !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
नरेंद्र  मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से अभी तक देश के बचे खुचे कोंग्रेसियों के पेट में उठने वाली मरोड़ अब साफ़ तौर पर दिखनी शुरू हो गयी है।  कांग्रेस को अब दिखने  लगा है कि उसने हिन्दुस्तान के लिए काफी कुछ किया है , देश को अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा  करने में कांग्रेस का बड़ा योगदान रहा है। धूर्त कोंग्रेसी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि देश वासियों को मूलभूत सुविधाएं देने में कांग्रेस के लोग पूरी तरह से असफल रहे हैं , कंप्यूटर क्रांति , परमाणु परीक्षण , अंतरिक्ष में राकेट भेजना , हर हाथ में मोबाइल देने से पेट नहीं भरता है , देश की जनता हर हाथ में काम मांगती है , देश की जनता हर पेट को रोटी मांगती है। यही वजह है कि बीजेपी ने जब अच्छे दिनों की बात की तो देश की जनता ने बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याक्षी नरेंद्र मोदी को अपना पूरा समर्थन दिया। यानी की साथ सालों में कांग्रेस देश वासियों को अच्छे दिन नहीं दे सकी थी। अब बात करें मोदी जी की ओर से किये गए वादों की जो उन्होंने चुनाव के दौरान किये थे। सत्ता हाथ से जाने के बाद से अब तक कांग्रेस बौखलाई हुई स्थिति से बाहर नहीं निकल सकी है। मोदी जी के प्रधान मंत्री बनने के दूसरे दिन से ही कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने अच्छे दिनों की रट लगानी शुरू कर दी , पंद्रह लाख रुपयों की मांग करनी शुरू कर दी। अब तो हद हो गई हर जगह मोदी जी का इस तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है जैसे मोदी जी कोई गलती कर बैठे हैं हिन्दुस्तान का प्रधान मंत्री बन कर। कांग्रेस का इतिहास देखें तो इन कांग्रेस वालों ने देश के राष्ट्रीय ध्वज से मिलता जुलता ध्वज अपने राजनीतिक दल का ध्वज बना लिया , ताकि लोगों को लगे कि कांग्रेस देश भक्ति में लीन है। आज़ादी की जंग में सभी लोगों ने जाती – धर्म भूल कर योगदान देते हुए कांग्रेस के झंडे तले संघर्ष किया और आज कांग्रेस वाले पूछते हैं कि आज़ादी की जंग में बीजेपी का योगदान क्या है ? संघ का योगदान क्या है ? नीचता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं कांग्रेस के लोग। आज़ादी मिलने के बाद तुरंत गांधी ने कहा था कि कांग्रेस को बर्खास्त कर दो , इसकी वजह भी यही थी कि कांग्रेस के बैनर टेल लड़ी गई आज़ादी की जंग अब खत्म हो गई है , अब विभिन्न विचारधाराओं के लोग अपनी विचार धारा को जनता के बीच रख सकतें क्योंकि अब देश आज़ाद है।  मगर कांग्रेस ने आज़ादी की जंग को भी अपने बाप की बपौती समझ कर बाकी दलों को बदनाम करना शुरू कर दिया और हर चुनावी सभा में सवाल करने लगी कि इस दल का आज़ादी की जंग में क्या योगदान रहा ? ऐसी कांग्रेस को अब लगने लगा है कि यह देश अब १९४७ का देश नहीं है जो नेहरू की बातों में आकर पेट बाँध कर सोएगा और ऊंचे ख्वाब देखेगा , अब देश बदल चुका है , लोग जागृत हो चुकें है। ऐसे में कांग्रेस के बचे खुचे लोग अब अपने बाप दादाओं के किस्से कहानियां सुनाकर एक तरह से देश की जनता से अपने लिए मुआवज़ा मांगने लगे है और इन कोंग्रेसियों को मुआवज़े के रूप में सत्ता चाहिए। ऐसे सत्ता के भूखे कोंग्रेसियों को जनता पहचान चुकी है और अब इनके झांसे में जनता आने वाली नहीं है।
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