प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा के दौरान तनाव में रहने वाले छात्रो के मार्गदर्शन पर लिखी किताब .

विकासऔर अच्छे दिनका मंत्र देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी अब तनाव दूर करने का मंत्र देने वाले हैं.

इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई किताब लिखी है. इस किताब का नाम है – ‘एक्ज़ाम वॉरियर्स’. पिछले तीन साल से बोर्ड की परीक्षा के ठीक पहले प्रधानमंत्री हर साल छात्रों को तनाव मुक्त रहने के लिए ‘मन की बात’ के ज़रिये संदेश देते रहे हैं.

लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है.

ऐसा इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री रहते हुए किताब लिखने वाले मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं. हालांकि ये पहला मौक़ा नहीं है जब मोदी ने कोई किताब लिखी है. मोदी इससे पहले ‘ज्योति-पुंज’, ‘सोशल हार्मनी’ और ‘इंडियाज़ सिंगापुर स्टोरी’ जैसी किताबें लिख चुके हैं.

इस साल बोर्ड की परीक्षा से ठीक पहले शनिवार को उनकी नई किताब ‘एक्ज़ाम वॉरियर्स’ बाज़ार में आ रही है.

पेंग्विन पब्लिकेशन ने इस किताब को छापा है.

छात्र अंकों के पीछे न भागें

पब्लिकेशन की एडिटर इन चीफ़ (कमर्शियल एंड बिज़नेस) मिली ऐश्वर्या ने बीबीसी को बताया, “हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किताब ‘एक्ज़ाम वॉरियर्स’ को प्रकाशित करते हुए बहुत गर्व का अनुभव हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी हर बार परीक्षाओं से पहले छात्र-छात्राओं से रेडियो प्रोग्राम ‘मन की बात’ में बात करते हैं और इस किताब को लिखने का विचार उन्हें यहीं से आया है.”

मिली के मुताबिक, किताब का सार ये है कि छात्र अंकों के पीछे न भागें और न ही उसकी वजह से तनाव में रहें. किताब में शिक्षा को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का नज़रिया दिखता है.

पेंग्विन प्रकाशन का दावा है कि किताब इस तरीक़े से लिखी गई है कि बच्चे इसे मज़े लेकर पढ़ेंगे. किताब में कई ऐक्टिविटी सेक्शन्स भी हैं.

अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी टिप्स

किताब को रोचक बनाने के लिए रोचक चित्रों का इस्तेमाल किया गया है. ऐक्टिविटीज़ के साथ-साथ योग को भी इस किताब में ख़ास जगह दी गई है. प्रकाशन का कहना है कि ये किताब, छात्रों की दोस्त साबित होगी.

208 पन्नों की इस किताब की कीमत 90 रुपए है. किताब लिखने का उनका तरीका फ्री स्टाइल डायलॉग का है.

किताब इस सार पर आधारित है कि बोर्ड की परीक्षा ऐसी होती है जिस दौरान न सिर्फ़ छात्र बल्कि पूरा परिवार, छात्रों के शिक्षक और आसपास का पूरा माहौल तनाव ग्रस्त हो जाता है.

किताब में इसी तनाव को कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने टिप्स दिए हैं. ये सुझाव केवल छात्रों को लेकर नहीं है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी हैं.

पिछले साल जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रेडियो भाषण ‘मन की बात’ के ज़रिए छात्रों को संबोधित किया था. उसमें परीक्षा के दौरान ‘प्रेशर’ और ‘प्लेज़र’ पर फ़र्क समझाया था. इसी मंत्र पर इस किताब में विस्तार से बात की गई है.

इस किताब में उनके बचपन से जुड़े किस्से भी होंगे. पेंग्विन प्रकाशन का कहना है कि मोदी चाहते हैं कि इस किताब के माध्यम से वो बच्चों के दोस्त बन सकें.

इतना ही नहीं ‘एक्ज़ाम वॉरियर्स’ में छात्रों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को किस तरह अनुस्पर्धा में बदला जाए इस पर भी बात की गई है. अनुस्पर्धा का मतलब है अपने पिछले रिकॉर्ड से ही स्पर्धा करना.

‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस तरह की स्पर्धा का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का ज़िक्र किया था. जिस तरह से अपने पूरे करियर में सचिन ने अपने ही पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ा है उससे छात्रों को सीखना चाहिए.

उनके मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से तनाव आता है इसलिए परीक्षा में अनुस्पर्धा से काम लेना चाहिए.

तनाव में छात्र

2015 के एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर घंटे एक छात्र खुदखुशी करता है. ज़ाहिर है इसमें छात्रों के बीच परीक्षा को लेकर तनाव भी एक बड़ी वजह है.

इन आंकड़ों में महाराष्ट्र सबसे आगे है, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ दूसरे और तीसरे नम्बर पर है.

आने वाले दिनों में इन आंकड़ों में कमी कैसे लाया जाए – इस सरकार के सामने ये भी एक बड़ी चुनौती है. इसलिए किताब की रिलीज़ के बाद 16 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी परीक्षा और तनाव पर छात्रों से बात भी करेंगे.

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम में किताब पर बात होगी और इसमें करीब 3500 छात्र हिस्सा लेंगे.

(साभार – बीबीसी)

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