बिना किसी चीरफाड़ के बच्चे के गले से निकाला गया एक रुपए का सिक्का

म विजय

ठाणे जिला अस्पताल में इस तरह की हुई पहली सर्जरी
ठाणे। ठाणे जिला सरकारी अस्पताल में बिना किसी चीरफाड़ के सर्जरी कर एक तीन साल के बच्चे के गले में फंसे एक रुपए के सिक्के को बड़ी ही सरलता से निकाल लिया गया। अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक इस तरह का यहां की गई यह पहली सर्जरी है। इससे पहले ऐसे केस सामने आने के बाद उसे मुंबई के जेजे, सायन या केईएम अस्पताल में भेज दिया जाता था। इस मामले में बच्चे की जान पर बन आई थी इसलिए सिविल अस्पताल में ही सर्जरी करने का निर्णय लिया गया, जो सफल रहा।
जिला अस्पताल की कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ डॉ माधवी पंदारे ने कहा कि मंगलवार की रात कृष्णा माने नामक तीन साल का बच्चा चिंताजनक स्थिति में यहां आया था। उसने एक रुपए का सिक्का निगल लिया था, जो सांस और अन्ननलिका (क्रिकोफारिग्स) में फंस गया था। डॉ माधवी ने कहा कि सिक्का ऐसी जगह फंस गया था, जिसे इस अस्पताल में निकलना किसी चुनौती से कम नहीं था। यदि सिक्का सांस नली में चला जाता तो बच्चे की सांस रुक जाती और पांच से छह मिनट के भीतर मौत हो जाती। बच्चे की स्थिति को देखते हुए रात भर चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया, क्योंकि उसने बच्चे ने कुछ देर पहले पानी पिया था।

जबकि सर्जरी के समय एनबीएम होना चाहिए। दूसरे दिन जिला शल्य चिकित्सक डॉ कैलाश पवार के मार्गदर्शन में डॉ माधवी के नेतृत्व में डॉ रुपाली यादव, डॉ नीरज झामरे और डॉ प्रज्ञा की टीम ने बुधवार की सुबह ही बच्चे की सर्जरी शुरू कर दी और बिना किसी चीरफाड़ के फोरसेप्टस की मदद से कुछ ही मिनट में सफलतापूर्वक सिक्के को गले से बाहर निकाल लिया गया। डॉ माधवी ने कहा कि जिला अस्पताल में इस तरह की सर्जरी पहली बार हुई है, जो अपने आप में एक उपलब्धि है।

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