लोकसभा चुनाव नजदीक आते देख बढ़ रही है शत्रुघ्न सिन्हा जैसे असंतुष्ट नेताओ की सक्रियता

(राजेश सिन्हा)

देश के प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नामो की घोषणा होने के साथ ही लालकृष्ण आडवाणी के प्रति अपनी आस्था दिखाते हुए बिहार के पटना साहिब सिट से सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा मोदी विरोधी शुर जारी रखे है.,और एक तय अंतराल (हर दो तीन महीने बाद) के बाद किसी भी मुद्दे पर मोदी विरोधी जहर उगलते रहते है,उनके इस खोचर गिरी से तो भाजपा संगठन में इनका महत्व भले ही शून्य हो गया है,लेकिन भाजपा विरोधी शुर के कारण वे केंद्र के साथ राज्यस्तरीय भाजपा विरोधी दलों के चहेते  बन गए है,पिछले दिनों इनके द्वारा मोदी विरोध में बनारस से समाजवादी पार्टी के टिकट पर संसदीय चुनाव में उतरने की भी खुसफुसाहट थी. लेकिन थोड़े समय में ही अपनी हैसियत समझ कर या फिर सपा नेताओ द्वारा दाव लगाने लायक घोडा नही समझ कर इनसे कन्नी काट ली.

नया मामला शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा राफेल मामले पर पूछे गए सवाल पर देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारामन ने करारा जबाब दिया,हर सवालों पर पुरे सिलसिलेवार उत्तर दिया,पुरे दो घंटे तक रक्षामंत्री के चले भाषण में इस सौदे का पूरा विवरण था, जिसके बाद कांग्रेस नेतागण सदन में निरुत्तर हो गए,

लेकिन वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव में भाजपा द्वारा पटना साहिब सिट से उम्मीदवारी नही मिलने का पूरा अंदेशा सांसद सिन्हा को हो गया है.इसीलिए उनकी छटपटाहट बुझते दिए के पास फडफडाते फतिंगे की बुझती लौ.. के साथ तडपन स्वभाविक है और लगातार छ महीनों से चल रहे ये राफेल विवादित मामले पर कांग्रेस को शांत होता देख, सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को ये नागावार गुजरा,और उन्होंने एन डी टी वी को दिए शायद प्रायोजित इंटरव्यू में केंद्र सरकार से राफेल डील की जांच के लिए सयुंक्त संसदीय कमिटी (जेपीसी) गठित करने की मांग कर दी.हलाकि यही मांग कांग्रेस की भी थी.

आज पूरा देश देख रहा है है की राफेल के मुद्दे पर राहुल गांधी पुरे देश को मुर्ख बना रहे है और शुक्रवार को भरी संसद में राफेल विषय पर चर्चा के दौरान राहुल द्वारा मजाक उड़ाने के लहजे में अपने सहयोगी को आँख मारने से यह साफ़ हो गया की ये सिर्फ एक कांग्रेसी सगुफा है,जो सिर्फ देश वासियों को भरमाने के लिए और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए है, लेकिन राफेल की बुझती आग को दुबारा जलाने की नाकाम कोशिश मोदी सरकार में शुरुवात से ही मंत्री पद की चाह रखने वाले और मंत्री पद नही मिलने से खिसियाए सांसद शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा किया जाना, बचकानी हरकत मानी जाएगी.

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