आखिर कांग्रेस किस बात के सपने देख रही है ?

(कर्ण हिन्दुस्तानी )
कांग्रेस के राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक पत्रकार परिषद में बीजेपी सरकार के दुबारा सत्ता में आने की संभावनाओं को खारिज किया है। राहुल गाँधी की  बातों से अब स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस की दूरदृष्टि अभी तक कमज़ोर ही है। कांग्रेस देश की जनता की नब्ज़ पकड़ने में अभी भी असफल है। कांग्रेस  देश को अभी भी इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के समय का देश मान कर चल रही है। जबकि आज की तारीख में देश  का हर  वर्ग मोबाइल और इंटरनेट के ज़रिए  दुनिया पर पैनी नज़र रखे हुए है।
देश का नया मतदाता देश की विकासशील योजनाओं को समझता है। यह नया मतदाता जानता है कि बरसों से जो सड़कें कच्ची थीं वह विगत पांच सालों में बन चुकीं हैं। घरेलू गैस  सिलेंडर के लिए १५ – २० दिन इंतज़ार अब नहीं करना पड़  रहा।  अब देश के ग्रामीण अंचलों में भी बिजली पहुँच रही है। घर की बहु अब खुले में नित्यकर्म करने नहीं जाती। देश की सुरक्षा  अब कोई समझौता नहीं होता। अब देश का नागरिक अपना जीवन सुरक्षित समझने लगा है।
युवा वर्ग खुद   के व्यवसाय का मालिक बना है। नौकरियों के अवसर यदि कम हुए हैं तो वहाँ कम हुए हैं जहां बोगस कंपनियों के नाम पर अतरिक्त भर्तियां की गयीं। कांग्रेस ने शुरू से ही युवाओं को सरकारी नौकरी ही नौकरी है। यह भ्र्म फैला दिया था। निजी क्षेत्रों में सरकारी  जैसी सुविधाएं देने जैसे प्रयास क्यों नहीं किये गए।  इस बात का कांग्रेस अध्यक्ष के पास कोई जवाब नहीं है।
आज यदि बी एस एन एल डूबने की कगार पर है तो इसकी ज़िम्मेदार कांग्रेस ही है , कांग्रेस के राज में ही  निजी टेलीकॉम कंपनियों को बढ़ावा दिया गया , ऐसे ऐसे करार किये गए कि सरकारी कंपनियों को पनपने का अवसर ही ना मिल पाए। विदेशी कंपनियों ने देश को किस तरह लूटा इसका सबसे बड़ा उदाहरण सी एफ एल बल्ब है। कांग्रेस के राज में यही बल्ब तीन – चार सौ रूपये में बिकता था और अब सौ से भी कम रूपये में उपलब्ध है। क्या यह लूट नहीं थी।
निजी टेलीकॉम कंपनियों ने मोबाइल के आने वाले कॉल्स के भी पैसे वसूले और जम कर वसूले। अटलजी की केंद्र में सरकार आयी और रिलायंस ने यह लूट रुकवायी। वरना आज भी आम उपभोक्ता मोबाइल कंपनियों के नाम पर जेब  खाली कर रहा होता। इतना बदलाव होने के बावजूद कांग्रेस किस आधार पर मानकर चल रही है कि जनता मोदी सरकार को नकारने के मूड में है। यह तो राहुल गाँधी और उनके चमचे ही जानते होंगें।
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