…….. और केजरू खुश हुआ !

(कर्ण हिंदुस्तानी )
आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली की सरकार को उनके अधिकारों का स्पष्ट ज्ञान करवा ही दिया। सर्वोच्च अदालत ने उपराज्यपाल को भी एकाधिकार जताने के लिए एक तरह से बेदखल करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुनी गई सरकार ही असली ताक़त है। इसलिए उपराज्यपाल को कैबिनेट की सलाह पर ही कार्य करना होगा। अदालत ने कैबिनेट को भी नसीहत दी और कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा ना होने के चलते दिल्ली की सरकार को अपने हर फैसले से उपराजयपाल को अवगत करवाना भी बंधनकारक होगा। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अवगत करवाने का अर्थ यह ना निकाला जाए कि हर फैसले में उपराज्यपाल की सहमती अनिवार्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उपराज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं हैं ऐसे में उपराज्यपाल की भूमिका खलल पैदा करने वाली नहीं होनी चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल काफी खुश हैं। उनको लग रहा है कि उन्होनें बहुत बड़ी जंग जीत ली है। केजरीवाल ने लगे हाथों सोशल मीडिया पर  एक बयान जारी कर कहा , अगर मोदी सरकार ने अवैध आदेश के जरिये चुनी हुई सरकार के हक छीने नहीं होते तो दिल्ली सरकार के तीन साल बर्बाद नहीं होते। अब बात फिर वही आती है कि चाहे अदालत का फैसला आये या फिर बिल्ली छींक जाए , हर मामले में जिम्मेदार सिर्फ मोदी सरकार ही है। विपक्षी दलों को मोदी मीनीया हो गया है। यह बात फिर एक बार केजरीवाल के बयान से साबित हो गया है। जबकि सर्वोच्च नयायालय ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस , क़ानून व्यवस्था और ज़मीन के सभी अधिकार उपराज्यपाल के अधीन ही रहेंगे। इन सबसे हट कर दिल्ली की चुनी हुई सरकार अपने हिसाब से क़ानून बना सकती है। खैर कुछ भी हो , सर्वोच्च नयायालय के फैसले से केजरू खुश हुआ यही काफी है।
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