हिन्दू संतो का हत्यासत्र; यह हिंदुत्व को मिटाने का नियोजनबद्ध षड्यंत्र ! – हिन्दू जनजागृति* समिति

*पालघर, बुलंदशहर, लुधियाना और अब नांदेड;देशभर में साधुआें का हत्यासत्र जारी !*

साधु-संतों की भूमि महाराष्ट्र में अब साधुआें के रक्त की नदियां बहाई जा रही हैं । कुछ दिन पूर्व पालघर जनपद में हुई २ साधुआें की हत्या का सूतक पूर्ण नहीं हुआ, तबतक उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक साधु की हत्या हुई । उसके तुरंत पश्‍चात पंजाब के होशियारपुर में एक साधु पर प्राणघाती आक्रमण किया गया । अब नांदेड जनपद में मध्यरात्रि में श्री ष.ब्र.१०८ सद्गुरु निर्वाणरुद्र पशुपति शिवाचार्य महाराज तथा उनके एक सेवक की निर्मम हत्या करने की घटना सामने आई है । समाज की निष्काम सेवा कर समाज का दिशादर्शन करनेवाले त्यागमूर्ति साधुआें की हत्या होना अत्यंत दुखदायक और क्षोभजनक है, अतः हिन्दू जनजागृति समिति कडे शब्दों में इस हत्या की निंदा करती है । केवल महाराष्ट्र ही नहीं, अपितु आज देशभर के विविध राज्यों में हिन्दू साधुआें को चुन-चुनकर मारा जा रहा है । उन पर प्राणघाती आक्रमण किए जा रहे हैं । इससे पूर्व अनेक राज्यों में हिन्दुत्वनिष्ठों की हत्याआें का षड्यंत्र रचकर उनकी हत्याएं की जा रही थीं; परंतु अब उसी प्रकार हिन्दू साधुआें को मिटाने का नियोजनबद्ध षड्यंत्र चल रहा है, ऐसा दिखाई देता है । हिन्दू जनजागृति समिति ने मांग की है कि इस षड्यंत्र के मूल तक जाकर इसके पीछे सक्रिय लोगों की खोज की जाए ।
साधुआें की हत्या करनेवालों में शासन और विधि का किसी प्रकार का भय नहीं रहा है, यही दिखाई दे रहा है । बार-बार हो रही साधुआें की हत्याएं समाजमन को क्षुब्ध कर रही हैं । इन हत्याआें को रोकने हेतु शासन को कठोर विधि बनानी चाहिए, साथ ही तीव्रगति से इन घटनाआें की जांच कर इस षड्यंत्र के पीछे जो कोई हों, उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए, यह हमारी मांग है ।
किसी गांव में किसी कारणवश एक मुसलमान की हत्या होने पर वामपंथी और मुसलमानों का गठबंधन ‘मॉब लिंचिंग’ का आक्रोश करता है । साथ ही समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी एवं आधुनिकतावादियों का गिरोह ‘अवॉर्ड वापसी’ के माध्यम से इन घटनाआें पर सिर पीटते हैं; परंतु हिन्दू साधुआें की हो रही हत्याआें के संदर्भ में ये लोग मौन धारण किए रहते हैं । इसके विरुद्ध कोई ‘अवॉर्ड वापसी’ नहीं करता, कोई इसे ‘मॉब लिंचिंग’ नहीं बोलता और किसी को ‘भारत में रहने से भय लगता है’, ऐसा नहीं लगता । यह चित्र दुर्भाग्यजनक है । हिन्दू साधुआें की हत्याआें के संदर्भ में मौन धारण करनेवालों की भी हम निंदा करते हैं, साथ ही इस पृष्ठभूमि पर हम यह आवाहन कर रहे हैं कि हिन्दू समाज भी अब साधुआें की हत्याआें के विरुद्ध वैधानिक पद्धति से आवाज उठाए ।

 

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