मध्‍य रेलवे और कडोंमपा के बीच पिस रहा है कल्याण रेलवे स्टेशन का कचरा निपटान

( गंगाधर तिवारी )
स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत मध्‍य रेलवे के कल्‍याण जंक्‍शन पर इन दिनों कचरे के निपटान को लेकर रेल प्रशासन और मनपा प्रशासन में खींचातानी चल रही है जिससे कचरे के निपटान करने में अड़चनें आ रही हैं। पता हो कि रेलवे अपने संसाधनों के सहारे रेल परिसर की साफ-सफाई करता है और कचरे की पेटियों को एकत्र करके रख देता है जिन्‍हें कडोंमपा की गाडि़या उठाकर ले जाती हैं तथा उनका निपटान डंपिंग ग्राउंड में कर दिया जाता है।

लगभग यही प्रणाली मुंबई के उपनगरों में काफी अर्से से चली आ रही है। कल्‍याण जंक्‍शन पर ऐसे करीब ढाई सौ से ज्‍यादा कचरा पेटियां हैं जिनमें सूखे और गीले कचरे एकत्र किए जाते हैं। यह विदित है कि पिछले कई वर्षों से रेलवे में साफ-सफाई के कार्य निजी कंपनियों को दिया गया है और उनका काम है साफ-सफाई करके सारे कूड़े इन पेटियों में जमा करके एक जगह पर रख देना जहां से मनपा की गाडि़यां उठाकर ले जाती हैं।

पहले यह व्‍यवस्‍था थी कि मनपा की घंटा गाड़ी आती थी और लोग उसमें कचरे डाल देते थे। ये गाड़ी वाले रेल परिसर से कचरा पेटियों के कचरे उठाकर गाड़ी में डाल लेते थे परंतु बाद में उन्‍होंने उठाना बंद कर दिया और रेल प्रशासन अपनी व्‍यवस्‍था के तहत इसे कचरे की गाड़ी में डलवाने लगी। यह भी देखा जाने लगा कि यह एक परंपरा बन गई और रेलवे की यह जिम्‍मेदारी हो गई कि वे अपने संसाधनों से कचरे इन गाडि़यों में डलवाएं।

यहां तक तो ठीक-ठाक चलता रहा परंतु अब कहा यह जा रहा है कि मनपा ने भी यह काम ठेके पर दे दिया है और उनके ठेके में रेलवे परिसर का कचरा उठाना शामिल नहीं है। यह खींचा-तानी पिछले तीन महीनों से चल रहा है। दोनों पक्ष अपनी अपनी दलीलों पर अड़े हुए हैं और व्‍यक्तिगत संपर्क और संबंधों के सहारे इस काम को निपटाया तो जा रहा है परंतु परेशान हो रहे हैं यात्री। प्‍लेटफार्म संख्‍या एक के पास आरक्षण कार्यालय के बगल में इन कचरा पेटियों को एकत्र किया जाता है परंतु इसका निपटान दैनिक आधार पर न होने की स्थिति में यह बदबू का स्रोत बन गया है।

सूत्रों के मुताबिक दोनों विभागों की दलीलें बड़े ही हास्‍यास्‍पद और तर्कपूर्ण ढंग पेश की जा रही हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि रेल परिसर में कचरा करने या डालने वाले कल्‍याण मनपा की जनता है और ये जनता साफ-सफाई के लिए मनपा को कर अदा कर रही है तो मनपा की यह जिम्‍मेदारी है कि इस कचरे का निपटान करे। मनपा का कहना है कि कल्‍याण मनपा को कर अदा करनेवाली कल्‍याण की जनता यदि ट्रेन से मुंबई या पुणे जाकर कचरा करती है तो क्‍या कडोंमपा वहां जाकर कचरे उठाएगी और क्‍या ये जनता रेल यात्रा मुफ्त में करती है, क्‍या उनसे रेलवे को फायदा नहीं होता।

परंतु वास्‍तविकता यह है कि यह प्रक्रिया लगभग सभी मनपा यानी ठाणे, मुंबई, नवी मुंबई अपना रही है तो कडोंमपा क्‍यों नहीं? भले ही दोनों पक्षों के तर्क-कुतर्क सामने आ रहे हैं परंतु एक सामान्‍य व्‍यवहार वाली बात तो यह है कि रेलवे प्रशासन उनसे साफ-सफाई करने के लिए तो नहीं कह रहा है केवल कचरा उठाकर उनका निपटान करने को कह रहा है। जनता, जो भुक्‍तभोगी है वह दोनों प्रशासनों को भुगतान कर रहा है। जहां तक रेल परिसर की साफ-सफाई का प्रश्‍न है और प्‍लेटफार्म संख्‍या 4-5 पर बदबू का सवाल है, कल्‍याण रेलवे प्रशासन ने यह दावा किया है कि जबसे ट्रेनों में बायो टायलेट आ गए हैं तबसे प्‍लेटफार्म संख्‍या 4,5 और 6 पर बदबू नहीं आ रहे हैं और पहले से काफी बेहतर है। वास्‍तविकता क्‍या है यह जनता तय करेगी।

साभार – एक्सरे रिपोर्ट साप्ताहिक

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