आजादी के बाद पहली बार नक्सल प्रभावित गावो के ग्रामीण गा रहे है देशभक्ति के गीत,

उत्तराखंड साथ देश के नक्सल प्रभावित सभी राज्यों के गांवो में अब स्थिति बदल रही है केंद्र में मोदी सरकार आने के पहले जहां इन गांव में आजादी के बाद से लेकर अब तक भारतीय तिरंगा फहराना नामुमकिन था और इन सभी गांव में नक्सलियों का काला झंडा ही फहराया जाता था.अब स्थिति बदल गई है अब हर गांव में भारत का तिरंगा फहराने लगा है राष्ट्रिय पर्व गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस  इन गांवों में धूमधाम से मनाया जाने लगा है नक्सलियों का प्रभाव कम होने के साथ गांव-गांव में प्रभात फेरी भी निकलने लगी हैं

उत्तराखंड के बस्तर जिले में पहले अंदरूनी गांवों में राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे की बजाय नक्सलियों का काला झंडा फहरता था, लेकिन केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद यहां की फिजा बदली है ये बाते यहाँ के हर ग्रामीण मानते है.। माओवादी विचारधारा पर इन ग्रामीणों के हौसले भारी पड़ रहे हैं। ऐसे गांवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जहां अब काला झंडा नहीं, तिरंगा फहराया जाता है। बस्तर संभाग के उन सैकड़ों गांवों में, जहां पहले नक्सलियों की तूती बोलती थी, अब बदलाव नजर आ रहा है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर व कांकेर जिले के गांवों में ग्रामीण अब नक्सलियों के फरमान को धता बता राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराने लगे हैं।और राष्ट्रीय पर्व इन गावो में त्योहारों जैसा माहौल रहने लगा है.

इन गांवों के स्कूलों में भी पिछले दो-तीन साल से ध्वजारोहण होने लगा है। जिसमें ग्रामीण भी पुरे जोश से शामिल होते हैं। कुछ गांवों में प्रभातफेरी भी निकाली जाने लगी है। बस्तर जिले के ओडिशा से लगे चांदामेटा व मुंडागढ़ में 2017 में प्रतिबंधित संगठन सीपीआइ माओवादी ने स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों को तिरंगा न फहराने की चेतावनी दी थी। इसके बाद इस इलाके में फोर्स ने गश्त व सर्चिंग अभियान चलाकर लोगों का मनोबल बढ़ाया। परिणाम यह हुआ कि नक्सली धमकी की परवाह न करते हुए ग्रामीणों ने इन गांवों में ध्वजारोहण किया।

बीजापुर जिले के बेदरे, फेरसेगढ़, मनकेली, गोरना, मुनगा, पुसनार आदि गांवों में नक्सली काला झंडा फहराकर राष्ट्रीय पर्व का बहिष्कार करते थे। फोर्स ने वहां पहुंचकर ग्रामीणों का मनोबल बढ़ाया तब ग्रामीणों ने भी तिरंगा फहराने की हिम्मत जुटाई। अब स्थिति यह है कि फोर्स के जवान अपने बैग में तिरंगा लेकर निकलते हैं और गांव-गांव में तिरंगा फहराते हुए आगे बढ़ते हैं।

सुकमा का गोमपाड़ अगस्त 2016 में पहली बार सुर्खियों में तब आया जब वहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी की अगुआई में ग्रामीणों ने आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया था। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा व कटेकल्याण ब्लॉक के दर्जनों गांव, जहां नक्सली राष्ट्रध्वज फहराने का विरोध करते थे, पिछले दो सालों में वहां भी हालात बदले हैं। आमतौर पर इन गांवों में नक्सली काला झंडा फहराकर अपना विरोध दर्ज कराते थे।

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